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उन्नाव की 41 टेनरियों को बंद करने का आदेश

अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव Updated Sat, 15 Jun 2019 12:39 AM IST
दहीचौकी स्थित सीईटीपी से निकलता प्रदूषित पानी।
दहीचौकी स्थित सीईटीपी से निकलता प्रदूषित पानी। - फोटो : अमर उजाला
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एनजीटी ने जिले के दोनों सीईटीपी (कामन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़ी सभी 41 टेनरियों को बंद करने का आदेश दिया है। एनजीटी के आदेश से चर्म उद्योग में खलबली मच गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि दोनों सीईटीपी और उनसे जुड़ी टेनरियों को बंद करने का आदेश शुक्रवार को मिला है। सीईटीपी और संबंधित टेनरियों के प्रबंधन को इसकी जानकारी दे दी गई है।
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी की सख्ती के बाद सीपीसीबी ने औद्योगिक क्षेत्र बंथर और दहीचौकी स्थित सीईटीपी में शोधन के बाद निकलने वाले पानी की जांच कराई। इसके लिए टीम ने पंद्रह दिन पहले लगातार पांच दिनों तक सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में सीईटीपी से निकलने वाला पानी प्रदूषित होने की पुष्टि होने पर एनजीटी ने सख्त कदम उठाते हुए दोनों सीईटीपी से जुड़ी टेनरियों को बंद कराने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के आदेश से बंथर औद्योगिक क्षेत्र की 27 और दहीचौकी क्षेत्र की 14 टेनरियों में तालाबंदी हो जाएगी। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर चर्म उद्योग और स्लाटर हाउसों पर पड़ेगा।


सीईटीपी अपग्रेड होतीं तो न होती बंदी
 यूपीसीबीसी और जिला प्रशासन की जांच में दहीचौकी और बंथर औद्योगिक क्षेत्र के सीईटीपी (कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) डेढ़ साल पहले ही एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मानकों को फेल हो चुका था। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी ने डेढ़ साल पहले टेनरियों का उत्प्रवाह आधा करा दिया था।  दोनों सीईटीपी को अपग्रेड करने के भी आदेश दिए गए थे। अगर समय रहते सीईटीपी अपग्रेड हो जाते तो टेनरियों को बंद करने के आदेश न होते।


बार बार मानकों पर फेल हो रहे दोनों सीईटीपी को अपग्रेड करने के लिए करीब दो साल पहले कवायद शुरू हुई थी। कंप्यूटरीकृत सिस्टम और जल शोधन के लिए आधुनिक उपकरण लगाने के लिए दहीचौकी सीईटीपी पर 50 करोड़ रुपये और बंथर सीईटीपी पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने थे। फैक्टरी संचालक सीईटीपी अपग्रेड करने के लिए सरकार से भी आर्थिक मदद की मांग कर रहे थे। भारी भरकम बजट की व्यवस्था न होने से सीईटीपी अपग्रेड नहीं हो पाए। नतीजतन डेढ़ साल से टेनरियों को उत्प्रवाह (बहाया जाने वाला पानी) आधा है इससे उत्पादन भी घटाना पड़ा। कुंभ स्नान के दौरान बंथर सीईटीपी से जुड़ी 52 फैक्टरियों को 15 दिसंबर 2018 से 15 मार्च 2019 तक के लिए बंद करा दिया गया था। बंदी से उद्यमियों को 6000 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

कहीं और शिफ्ट करेंगे उद्योग
उत्तर प्रदेश चर्म उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष ताज आलम ने बताया कि बार बार बंदी से व्यापार चरमरा गया है। समय से आर्डर पूरे न हो पाने से विदेशी खरीदारों का व्यावसायिक भरोसा भी खो रहे हैं। विदेशी व्यापारी भारत के बजाय पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, जापान व अन्य देशों से चमड़ा खरीदना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही अन्य उद्यमियों के साथ मिलकर सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे।

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