हत्या की बात कह रुकवाया सौतेली मां का दाह संस्कार

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Wed, 28 Oct 2020 09:12 PM IST
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मां की हत्या की आशंका जता पुलिस को सूचना देने वाला बड़ा बेटा संजय ।
मां की हत्या की आशंका जता पुलिस को सूचना देने वाला बड़ा बेटा संजय । - फोटो : UNNAO

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उन्नाव। हत्या की आशंका जताते हुए एक व्यक्ति ने अपनी सौतेली मां का दाह संस्कार रुकवा दिया। पुलिस ने घाट पहुंचकर वृद्धा का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम में बीमारी से मौत की पुष्टि हुई है। सूचना देने वाले व्यक्ति का कहना है कि मरने वाली वृद्धा उसकी मौसी है। उसने मां के निधन के बाद पिता से शादी कर ली थी। वहीं वृद्धा के छोटे बेटे का कहना है कि बड़े बेटे ने संपत्ति का वारिस बनने के लिए मां का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया था। पुलिस का कहना है कि मृतका के पति और बड़े बेटे के बीच संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पोस्टमार्टम के बाद वृद्धा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
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आदर्श नगर निवासी 70 वर्षीय राम सजीवनी उर्फ लक्ष्मी देवी (75) पत्नी करुणाशंकर अवस्थी की मंगलवार शाम मौत हो गई थी। बुधवार सुबह परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर जाजमऊ पहुंचे। अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। मृतका के बड़े बेटे संजय अवस्थी ने पुलिस से शिकायत कर सौतेली मां की हत्या की आशंका जताते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की। घाट पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम में बीमारी से मौत की पुष्टि के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया। कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्र ने कहा कि अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
मां का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने पर हुआ था गिरफ्तार
मृतका के छोटे बेटे शैलेश अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2009 में उसके बड़े भाई संजय ने मां रामसजीवनी का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर संपत्ति का वारिस बनने के लिए तहसील में प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया था। इसकी जानकारी होने पर मां ने संजय के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्ष 2011 में पुलिस ने संजय को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे जेल भेजा था। तीन माह बाद वह जमानत पर छूटकर आया था।
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मौसी की जगह मां का नाम दर्ज कराने का आरोप
हत्या की आशंका जताकर पुलिस को सूचना देने वाले संजय अवस्थी का कहना है कि जिस 70 वर्षीय राम सजीवनी उर्फ लक्ष्मी की मौत हुई, वह राम सजीवनी नहीं बल्कि उसकी मौसी रामकली उर्फ सावित्री देवी है। उसके जन्म के समय मां की देखभाल के लिए मौसी उनके यहां आई थीं। संजय के अनुसार पिता ने मां राम सजीवनी को घर से निकाल दिया। मां उसे (संजय) लेकर मायके दबौली में रहने लगी थीं। वर्ष 2003 के बाद पिता ने मतदाता पहचान पत्र में मौसी रामकली का नाम राम सजीवनी दर्ज करा दिया। इसी नाम से आधार कार्ड भी बनवा दिया। नाना द्वारा मां को दी गई आठ बीघा जमीन में पांच बीघा जमीन मौसी को राम सजीवनी बताकर दाखिल खारिज करा दी।
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