जिला अस्पताल में बिना दवा के इलाज

Unnao Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। यदि आप को बुखार, खांसी या जुकाम है तो जिला अस्पताल की उम्मीद छोड़ दें। पांच महीने से इस सरकारी अस्पताल में जरूरी दवाएं नदारद हैं। बुखार में इस्तेमाल होने वाली पैरासीटामाल दवा भी नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी दवा सप्लाई न करने वाली कंपनियों का अनुबंध रिन्यू न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन मुश्किल उन गरीबों को उठानी पड़ रही है जो इलाज की आस लिए दूर से जिला अस्पताल आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में मई से दवाओं का टोटा है। जिला अस्पताल को विभिन्न दवा कंपनियों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली 110 तरह की दवाओं में करीब एक सौ नदारद हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस अनदेखी का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों में बांगरमऊ के महेश ने बताया कि यहां दवा के नाम पर कुछ नहीं है। सिर्फ ग्लूकोज की बोतल लगाई जाती है उसके लिए वीगो बाहर से लानी पड़ती है। सफीपुर के रामदीन ने बताया कि डाक्टर बाहर से जो दवाएं लिखते हैं वह काफी महंगी होती हैं। आलम यह है कि जिला अस्पताल में पैरासिटामाल, लेट्रोजिन, डाइक्लोफिनिक, एंटीबाइटिक जैसी साधारण दवाएं तक नदारद हैं। डिस्पोजल सिरिंज और वीगो तक बाहर से खरीदकर लानी पड़ती हैं।

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रेट व कांट्रेक्ट रिन्यू न होने से सप्लाई ठप
उन्नाव। दवाओं की सप्लाई करने वाली कंपनियों में यूनीक्योर, लेबोरेट फार्मास्युटिकल, पंजाम फार्मोलेशन लखनऊ, बायोलिजिकल लिमिटेड हैदराबाद, कर्नाटक एंटी बाइटिक गुड़गांव, बाल फार्मा बैंगलोर, मान फार्मा, संजीवनी पैरेटल मुंबई सहित दर्जन भर कंपनियों को चिकित्सा और स्वास्थ्य निदेशालय ने वर्ष 2011-12 में दवाओं की सप्लाई का अनुबंध किया था। अनुबंध का समय खत्म हो जाने के बाद कंपनियों ने मई 2012 से दवाओं की आपूर्ति बंद कर दी। सीएमएस के लगातार रिमाइंडर के बाद निदेशालय ने दो बार 45-45 दिन के लिए अनुबंध बढ़ाया मगर दवाओं के रेट रिन्यू न होने के कारण कंपनियों ने दवाओं की आपूर्ति शुरू नहीं की।

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डाक्टर बोले बाहर से दवा लिखने की मजबूरी
उन्नाव। जिला अस्पताल में रोज औसतन 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैं। मरीजों को ज्यादातर दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक डाक्टर ने बताया कि मरीज का बेहतर इलाज करना उनकी जिम्मेदारी है। दवाओं के अभाव के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है। फायदा न होने पर तीमारदार खुद बाहर से दवा लिखने की मांग करते हैं। हालांकि वह इसे तीमारदारों की मजबूरी बताते हैं क्यों कि जिला अस्पताल के स्टोर में जरूरी दवाएं ही नहीं हैं।

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नर्सिंगहोम संचालकों की बढ़ी कमाई
उन्नाव। जिला अस्पताल की इस बदहाली का फायदा मेडिकल स्टोर और नर्सिंगहोम उठा रहे हैं। जिला अस्पताल में दलालों की भीड़ लगती है। यह दलाल मरीजों को आसपास के नर्सिंगहोम में भर्ती करवा कर मोटी कमाई करते हैं।

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निदेशालय को फिर भेजा रिमाइंडर
सीएमएस डा. आरडी विमल ने बताया कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय को पिछले सप्ताह रिमाइंडर भेजा गया है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।

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