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यहां तो गंगा की बाढ़ भी कुछ देकर जाती है

Unnao Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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परियर (उन्नाव)। वैसे तो गंगा में बाढ़ के न आने की मन्नत सभी तटवासी मनाते हैं। बाढ़ से आसपास के लोगों को नुकसान भी खासा उठाना पड़ता है। लेकिन परियर क्षेत्र की गणित कुछ हट कर है। यहां पर तो बाढ़ आने पर भी लोगों को बड़े लाभ के अवसर मिलते हैं।
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बहुंत संभव है कि परियर क्षेत्र में अधिकांश लोग बाढ़ न आने की मन्नत मांगते हों। यहां पर लोगों के मन की बात तो यह है कि बाढ़ आए तो ही बेहतर है। क्योंकि बाढ़ से होने वाला नुकसान लाभ की अपेक्षा काफी कम होता है। क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में तालाब थे। इधर लगातार बाढ़ आने से तालाबों की संख्या और बढ़ गई है। इसका कारण है कि जब बाढ़ का पानी लौटे तो कुछ देकर जाए। वैसे तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी यही कहता है कि गंगा का पानी खेतों को इतने पोषक तत्व देकर जाता है कि अगली फसल में कीटनाशक व उर्वरकों का प्रयोग न के बराबर करना पड़ता है। उपज डेढ़ से दो गुना तक स्वत: बढ़ जाती है। यह फसल पूरी तरह से जैविक खाद पर आधारित होने के कारण बाजार में सामान्य से अधिक कीमत दिलाती है। इसके अलावा मछली कारोबार बड़े पैमाने पर चल निकलता है। इससे अगले छह महीने तक निरंतर लाभ मिलता है। सिंघाडे़ और नरगुजरी (कमलगट्टा) का फूल और उसमें पानी के अंदर लगने वाला फल किसानों को लाखों का लाभ देता है। कई गांव तो ऐसे हैं जो कि बाढ़ उतरने के बाद ग्राम सभा के तालाबों की बाकायदा नीलामी करते हैं। इससे मिलने वाली धनराशि गांव के विकास के कार्य काम आती है। ग्राम सभा परियर, मरौंदा मझवारा, मरौंदा सूचित, कटरी मरौंदा मंझवारा, बरधना, हाजीपुर, रौतापुर, अगेहरा समेत कई अन्य गावों के प्रधान प्रभावती, आशादेवी, सुंदरलाल, सुनीता देवी समेत अन्य ने बताया कि बाढ़ आने के बाद तालाबों की नीलामी से उनकी ग्राम सभाओं को लाखों का लाभ मिलता है।


कुछ इस तरह से मिलता है लाभ
गंगा नदी में बाढ़ से क्षेत्र के करीब तीन दर्जन से अधिक गांवों तक पानी पहुंच जाता है। बाढ़ कम होने की स्थिति में क्षेत्र के तालाबों और झीलों में पानी रुक जाता है। इससे स्थानीय लोगों को यह लाभ होते हैं-
-गंगा के पानी के साथ बहकर आने वाली मछलियां बाद में लाखों में बेंची जाती हैं। इससे ग्राम सभाओं को तालाबों की नीलामी कर आर्थिक लाभ मिलता है।
-खेतों में बालू और पोषक तत्वों की रुकावट हो जाती है। यह अगली फसल में उत्पादन को डेढ़ से दो गुना तक बढ़ा देती है।
-खेतों में कीटनाशक और उर्वरक तत्वों के कम प्रयोग के साथ सींच भी कम करनी होती है।
-परियर से चकलवंशी तक करीब 12 किलोमीटर लंबी महना झील में ठंड के मौसम में नरगुजरी का फूल खिलता है। यह बाजार में साठ से सौ रुपए किलो के भाव से बिकता है। इसका उपयोग दवाओं में किया जाता है।
नरगुजरी में ही पानी के अंदर लगने वाले फल के बीज खाने के उपयोग में आते हैं। इसकी भी बाजार में ऊंची कीमत मिलती है।
छोटे तालाबों में पानी भरने की स्थिति में किसान मत्स्य बीज भी पालकों को बेंच कर लाभ कमाते हैं।
तालाब सिंघाडे़ की खेती के लिए अधिक उपजाऊ हो जाते हैं। इसमें रोग भी अपेक्षाकृत कम लगते हैं।
जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण बेचैन
परियर (उन्नाव)। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से दर्जनों गांवों मेें हड़कंप मच गया है। लगातार कई दिनों से जलस्तर बढ़ने से पानी कई गांवों के पास तक पहुंच गया है। ग्रामीण रात मेें जागकर जलस्तर पर नजर रखे हैं।
सदर तहसील क्षेत्र के पनपथा, धनकूखेड़ा, गंगादीनखेड़ा, लल्लतूपुरवा, देवीपुरवा, बंधनपुरवा, मानाबंगला, चंदीबंगला, बाबूबंगला, कोलवा, टेपरा, बेनीपुरवा, बरहुला, कनवापुरवा, लेंगड़ा पुरवा सहित आधा सैकड़ा गांवों पर गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से खतरा मंडरा रहा है। गंगा नदी में बढ़े जलस्तर से उक्त गांवों के ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। बढ़ते जलस्तर से प्रभावित गांवों के लोगों के सामने फिर एक बार खाने-कमाने की समस्या आती दिखाई पड़ी रही है। प्रभावित गांवों के लोग अपने घरों की छतों व पेड़ पर मचान बना रात भर जागकर जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। कई गांवों के लोगोें ने बाढ़ को देखते हुए नावें भी तैयार कर ली है।

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