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जिला योजना समिति में छिड़ी वर्चस्व की जंग

Unnao Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। जिले के विकास का तानाबाना बुनने वाली जिला योजना समिति में वर्चस्व की जंग छिड़ गई है। निर्वाचित सदस्यों पर पदेन सदस्य भारी पड़ रहे हैं। निर्वाचित सदस्यों से सुझाव तक नहीं लिए जा रहे हैं। इससे वे इतने ज्यादा खफा हैं कि जिला योजना समिति की बैठक में पेश किए जाने वाले सभी प्रस्तावों का पुरजोर विरोध करने की तैयारी कर ली है।
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जिले के विकास कार्यों के लिए विभिन्न विभागों द्वारा कार्ययोजना तैयार की जाती है। इसमें जिला पंचायत के 24 निर्वाचत सदस्य होते हैं। इन सदस्यों का चुनाव जिला पंचायत के 46 सदस्य करते हैं। इसके अलावा इतने ही पदेन सदस्य हैं। इनमें सांसद, विधायक, निकायों के अध्यक्ष शामिल होते हैं। जिला योजना समिति की बैठक में विकास कार्यों के लिए बजट तय किया जाता है। क्षेत्र के विकास के लिए जिला पंचायत सदस्य अपने प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजते हैं। नयी जिला पंचायत का गठन हुए दो साल बीत चुके हैं। इस दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपने क्षेत्र में नाली, सड़क, विद्युतीकरण, हैंडपंप आदि विकास कार्यों के सैकड़ों प्रस्ताव भेजे लेकिन इनमें से किसी भी सदस्य का एक भी प्रस्ताव अधिकारियोें ने स्वीकार नहीं किया। जिला पंचायत सदस्य रघुराज यादव का कहना है विभागोें के अधिकारी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों प्रस्ताव दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्ययोजना बनाते हैं। उनका आरोप है अधिकारी लोकतंत्र मेें नौकरशाही तंत्र चला रहे हैं। यही कारण है जिला पंचायत सदस्यों का एक भी प्रस्ताव कार्ययोजना में शामिल नहीें किया जाता है। उन्होंने बताया चार दिन पहले हुई जिला पंचायत की बैठक मेें अधिकारियोें की मनमानी कार्यशैली पर विधायकों ने भी विरोध जताते हुए कार्ययोजना बनाने से पहले जन प्रतिनिधियों से सलाह लेने को कहा था। वह कहते हैं अधिकारियोें की नजर में जन प्रतिनिधि शायद कुछ भी नहीं है। यही कारण है विभाग मनमाने ढंग से कार्ययोजना बनाते हैं और सीधे जिला योजना समिति की बैठक में प्रस्तुत करते हैं। जिला पंचायत सदस्योें को बैठक से पहले यह भी नहीं पता होता कि विभागों ने किस क्षेत्र के विकास के लिए क्या कार्ययोजना बनाई है। बैठक में प्रस्तावों पर ठीक से चर्चा भी नहीं हो पाती और अनुमोदन करना पड़ता है। जिला पंचायत सदस्य शुजाउर्रहमान सफवी का कहना है छप्पन हजार नागरिकोें का प्रतिनिधित्व करने वाले जिला पंचायत सदस्य अधिकारियों की अलोकतांत्रिक कार्यशैली से परेशानी महसूस कर रहे हैं। उनके विकास प्रस्ताव अधिकारी स्वीकार ही नहीं करते हैं। उनकी मांग है विभाग जो कार्ययोजना बनाते हैं उसकी एक प्रति जिला योजना की बैठक से कम से कम एक माह पहले सभी जिला पंचायत सदस्यों को उपलब्ध कराई जाए ताकि उसका अध्ययन कर कमियों को दूर कराने का प्रयास किया जा सके। रघुराज यादव ने कहा यदि जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव कार्ययोजना में शामिल न किए गए और उनकी सलाह पर अधिकारियों ने ध्यान न दिया तो सभी सदस्य अनुमोदित प्रस्ताव को पास नहीं होने देंगे। उधर जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव न लिए जाने के लिए अधिकारी दूसरे तर्क देते हैं। एक विभागाध्यक्ष ने बताया विधायकों और सांसद के ही इतने ज्यादा प्रस्ताव आ जाते हैं कि मजबूरी में जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव रोकने पड़ते हैं।

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