एक माह में देें बिजली कनेक्शन

Unnao Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। सारी औपचारिकताएं पूरी करने व पूरा पैसा जमा करने के दो साल बाद भी विद्युत विभाग ने नलकूप कनेक्शन नहीं किया। इसके उलटे उपभोक्ता को 19 हजार से अधिक का बिल भेज दिया। उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई करते हुए विभाग की सेवा में कमी मानी। फोरम ने विद्युत विभाग को एक माह के अंदर स्टीमेट के अनुसार कनेक्शन देने का आदेश दिया। इसके अलावा उपभोक्ता को 50 हजार क्षतिपूर्ति व 4 हजार रुपए परिवाद व्यय देने के भी आदेश दिए । 30 दिन के अंदर कनेक्शन न देने पर विभाग को प्रत्येक माह 3 हजार रुपए अदा करने होंगे।
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हसनगंज के नई सरांय निवासी कृषक विनोद कुमार ने लघु सिंचाई के माध्यम से संचालित निजी नलकूप में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करते हुए 30 जुलाई 2009 को 200 रुपए जमा किए। विद्युत वितरण खंड दो के अधिकारियों ने 33, 600 रुपए का स्टीमेट बनाया। विनोद ने 31 जुलाई 09 को पूरा पैसा जमा कर दिया। 11 अगस्त को सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गईं। इसके बाद भी कनेक्शन दिए बिना ही 19,864 रुपए का बिल भेज दिया गया। उसने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। कोर्ट में विद्युत वितरण खंड द्वितीय व पावर कारपोरेशन ने 16 अगस्त 2009 को केबिल लगाकर नलकूप की बिजली आपूर्ति चालू होने की जानकारी दी। फोरम ने सुनवाई में पाया कि कुछ तथ्य विभाग के कथन के विरुद्ध हैं। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विभाग की ओर से उपभोक्ता का कनेक्शन जोड़ा गया। फोरम के मुताबिक, स्टीमेट के अनुसार परिवादी को कनेक्शन नहीं दिया गया। सेवा में कमी पाते हुए फोरम ने आदेश दिए कि विद्युत विभाग एक माह के अंदर उपभोक्ता को कनेक्शन दे। इसके अलावा समयावधि में कनेक्शन न देने पर प्रत्येक माह 3 हजार रुपए कनेक्शन करने तक देना होगा। इसके अलावा पीड़ित को 50 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति व 4 हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में देने के आदेश दिए हैं।
गलत स्टीमेट देकर वसूली जा रही धनराशि
उन्नाव। फोरम ने माना कि बिजली विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बढ़ा-चढ़ाकर स्टीमेट देकर गलत धनराशि वसूल कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी का यह मानना कि उनके द्वारा कनेक्शन संयोजित नहीं किया जाना था बल्कि औपचारिकताएं पूरी होने पर उपभोक्ता स्वयं केबिल लगाकर कनेक्शन ले लेगा, गलत है। बिजली कनेक्शन देने में केवल प्रशिक्षित व्यक्ति ही सक्षम है। विभागीय अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया बल्कि एक बार भी मौके पर जाकर जांच नहीं की।
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