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भ्रष्टाचार का गुलाम हो गया देश

Unnao Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। भले ही हमारी आजादी के 65 वर्ष बीत गए हों, लेकिन समाज के वयोवृद्ध लोग इसे पूर्ण आजादी अभी भी नहीं मानते। इनके अनुसार तब भारत गोरों के कब्जे में था। अब भ्रष्ट नेताओं व भ्रष्टाचार के कब्जे में फंस गया है। सामाजिक व्यवस्थाएं तार तार हो गई हैं। महिलाओं का अस्तित्व खतरे में है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। तब ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था, अब विभिन्न ब्रांड की कंपनियां लोगों का खून चूस रही हैं।
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शहर के मोहल्ला कलक्टरगंज में रहने वाले 87 वर्षीय रतन शंकर मिश्रा ने बताया कि ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के बाद लोगों को जब सन 1947 में आजादी मिली तो उन्होंने गोले, पटाखे फोड़े आपस में गले मिल मिठाईयां बांटी। उनको यह लगा कि अब हम लोग स्वतंत्र हो गए हैं। कुछ सालों तक तो माहौल ठीक रहा। उसके बाद जब देश की कमान जवाहर लाल नेहरू के हाथ में आई तो जनता ने खुशी में पटाखे दगाए। साथ ही खुले आसमान में जीवन जीने की तमन्ना जगी। समय बीतता गया और सत्ता में रहने वाले कमाई के चक्कर में पड़ गए।

श्री मिश्र ने बताया कि आज हालत यह है कि महिलाओं को आबरू बचाना मुश्किल हो गया है। महंगाई के चलते गरीबों को भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है। पहले लोग अंग्रेजों के जुल्म से आत्महत्याएं कर लेते थे। अब गरीबी व शोषण की चलते आत्महत्या कर रहे हैं। अंग्रेजों के शासनकाल में तो लोगों को अंग्रेजों का ही जुल्म झेलना पड़ता था। अब सरकार व अमीर लोगों का जुल्म झेलना पड़ रहा है।
वहीं मोहल्ला सिविल लाइन में रहने वाले (89) वर्षीय रमाकांत शुक्ला का कहना है कि अंग्रेजों के शासन काल में लोग मेहनत मजदूरी कर पेट भरते थे। इस कारण निरोग रहते थे। अब दलाली व भ्रष्टाचार के चलते लोगों को कोई कार्य तो करना नहीं पड़ता साथ ही जनसंख्या में भी वृद्धि हो रही है। अंग्रेजों के शासनकाल में लोगों के अंदर मानवता थी। लोग एक दूसरे का दुख दर्द समझते थे। यदि अंग्रेजों के द्वारा किसी को प्रताड़ना दी जाती थी। तो उसके बचाने के लिए दूसरे लोग अपनी जान तक गंवा देते थे। तब चोरियां बहुत कम होती थीें। अब हालात यह हैं कि हर दिन कहीं न कहीं चोरी की खबर सुनने में आया ही करती है। तब की पुलिस आज की तरह लापरवाह नहीं थी। मुस्तैदी से काम करती थी। इनका कहना था कि आज के नेताओं के शासन से तब के अंग्रेजों का शासन काफी अच्छा था।

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