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फसलों की क्रेडिट में खासा इजाफा

Unnao Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। सरकारें भले ही न मानें कि किसान पर महंगाई का बोझ बढ़ा है लेकिन जिला टेक्निकल कमेटी ने इस बात को कबूल कर लिया है। नतीजतन कमेटी ने फसली ऋण की क्रेडिट में न केवल वृद्धि कर दी है बल्कि नकदी कृषि उपजों को भी इस ऋण में शामिल कर लिया है। खरीफ में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी धान और रबी में गन्ना व चने में की गई है।
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बीते एक वर्ष में डीजल और मोबिल आयल के दाम बढ़ने से जुताई और सिंचाई के साथ मंड़ाई का खर्च बढ़ गया। उर्वरक, बीज के दामों के साथ मजदूरी में भी खासा इजाफा हुआ। फसली ऋण की क्रेडिट तय करने के लिए बनी जिला तकनीकी कमेटी ने उत्पादन लागत बढ़ने से किसानों को आ रही समस्या को समझा। कुछ महीने पहले हुई कमेटी की बैठक में फसली ऋण का वित्तमान (क्रेडिट) बढ़ाने का फैसला लिया गया। खरीफ फसल के तहत धान की फसल में 3755 रुपए, मूंगफली में 3142, ज्वार में 2605, बाजरा में 1636, मक्का में 2671, उई-मूंग में 1866, अरहर में 2622 और तिल में प्रति हेक्टेयर 250 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार रबी फसलों में सबसे ज्यादा क्रेडिट गन्ने में हुई है। इस सफल की क्रेडिट में 4444 रुपए का इजाफा कर दिया गया है। चने में 3055 और गेहूं में 2016 रुपए ही बढ़ाए गए हैं। रबी की फसल जौ में 2787, मटर में 2207, मसूर में 2671,अलसी मेें 2157, राई-सरसों में 1371, और सूरजमुखी में 810 रुपए बढ़ाए गए हैं।

सब्जी की खेती पर भी मिलेगा कर्ज
उन्नाव। अभी तक बैंकें केवल आलू पर ही फसली ऋण देती थीं। किंतु जिले में सब्जियों के रकबे में हो रही वृद्धि और इसके जरिए किसानों की सुधर रही आर्थिक स्थिति ने बैंकों को सब्जियों पर फसली ऋण देने पर मजबूर कर दिया है। जिला तकनीकी कमेटी ने इस बार शंकर प्याज, ओपी प्याज, लहसुन, अदरक, शंकर व सामान्य वर्ग की गोभी, शलजम, गाजर, मूली, शंकर टमाटर, शंकर बैगन, शंकर भिंडी, पालक, मेथी, सलाद, लोबिया, परवल, शंकर मिर्च, अरबी, शंकर कद्दू, मटर, धनियां, पुदीना, शंकर खीरा, ककड़ी, शंकर तरबूज और खरबूजा को भी फसली ऋण की क्रेडिट में शामिल कर लिया गया है। फलों की खेती में पपीता के लिए 20000,आम के लिए 50000,अमरूद और पान के लिए 35000-35000 रुपए क्रेडिट तय की गई है।

इनसेट
सफेद मूसली और ग्लैडियोलाई की सबसे ज्यादा क्रेडिट
उन्नाव। औषधीय और फूलों की खेती की फसली ऋण की क्रेडिट अन्य फसलों की अपेक्षा कई गुना अधिक है। औषधीय खेती में सफेद मूसली पर प्रति हेक्टेयर दो लाख बीस हजार, सतावर पर 80 हजार, अश्वगंधा पर 45000, तुलसी की खेती पर 35000, मेंथा की खेती के लिए ऋण का वित्तामान 25000 रुपए तय किया गया है। इसी तरह फूलों में ग्लेडियोलाई पर 3 लाख 20 हजार, केला सकर्स पर 60000 निर्धारित किए गए हैं।

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