मीडिया से दूर रहें बीईओ, एबीआरसी

Unnao Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। शिक्षा विभाग में अब कमियां छुपाने की कोशिश की जा रही है। शायद इसीके चलते सोमवार को हुई एक बैठक में बीएसए ने बीईओ, एबीआरसी सहित शिक्षकों को मीडिया को किसी भी तरह का बयान न देने को कह दिया है। बीएसए का तर्क है कि मीडिया खामियों को तिल का ताड़ बनाकर उजागर करता है
बेसिक शिक्षा विभाग में एक के बाद एक गड़बड़ियों के लगातार प्रकाशन को विभाग के आला अधिकारी ने गंभीरता से लिया है। विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर से खबरों को संज्ञान लिए जाने के बाद किए गए जवाब तलब से वे मीडिया के साथ ही अपने मातहतों पर भी नाराज हैं। हाल में ही हुई एक बैठक में उन्होंने सभी खंड शिक्षाधिकारियों और एबीआरसी को इसके लिए मौखिक निर्देश भी दिए। उनका कहना था कि विभाग का कोई कर्मचारी यदि कोई गड़बड़ी करता है तो दूसरा पक्ष इसकी शिकायत उनसे करे, न कि मीडिया को बताएं। उन्होंने गलती करने वाले कर्मचारी को दंडित किए जाने की चेतावनी दी लेकिन कितने ही कर्मचारी ऐसे भी रहे जिन्हें अपने उच्चाधिकारी की यह बात नागवार भी गुजरी।
मालूम हो कि जिले में जबसे नए बीएसए आए हैं तबसे आकस्मिक निरीक्षणों का दौर जारी है। उन्होंने शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षक से एबीआरसी बनाए गए लोगों को भी निरीक्षण के लिए अधिकृत कर दिया। जिले के विभिन्न ब्लाकों से निरीक्षण के नाम पर एबीआरसी की ओर से पक्षपात किए जाने की भी खबरें आ रही हैं। अब इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि विभाग की बातें मीडिया तक ही न पहुंचें।
इस संबंध में बीएसए डा. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि वैसे तो वे स्वयं भी मीडिया को बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं लेकिन मीडियाकर्मी उनसे कभी भी बयान ले सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कुछ मामलों में मीडिया तिल का ताड़ बना देता है। ऐसे में कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने हाल में प्रकाशित हुई खबरों को संज्ञान लेकर पूरी तहकीकात करने की बात भी कही।

भूलवश किये बैक डेट में हस्ताक्षर: बीएसए
उन्नाव। हाल में ही नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र में सेरसा प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में एबीआरसी की ओर से किए गए निरीक्षण और कुछ ही देर बाद दूसरे एबीआरसी के निरीक्षण के बाद अनुपस्थित शिक्षिकाओं का आकस्मिक अवकाश अंकित किए जाने और सूचना के बाद भी एक शिक्षक को उपस्थित किए जाने का मामला अमर उजाला ने प्रकाशित किया था। इसमें बीएसए ने कहा था कि यदि ऐसा है तो एबीआरसी पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरे दिन रविवार को एबीआरसी प्रधान शिक्षिका के साथ अभिलेखों में हेरफेर करने के इरादे से स्कूल गए थे। इसके बाद हद तो सोमवार को हो गई जब बीईओ मामले की जांच करने गए और उन्होंने प्राथमिक स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में अपना निरीक्षण बैक डेट में अंकित कर दिया। तीनों ही दिन अमर उजाला ने निरंतर बीएसए से बात भी की और खबरों का प्रकाशन भी किया। लेकिन मंगलवार को बीएसए ने बताया कि उन्होेंने पूरी जानकारी की है और एबीआरसी को बैठक में फटकार भी लगाई। बैक डेट में बीईओ के हस्ताक्षर किए जाने के मामले को उन्होंने महज भूल करार दिया।

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