अब फंसेंगे घपला करने वाले शिक्षक

Unnao Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में कराए गए विद्युतीकरण की जांच को प्रदेश स्तरीय टीम बुधवार को जिले में होगी। इस कार्य में भ्रष्टाचार की भनक एडी बेसिक को पूर्व में ही लग चुकी थी। उन्होंने जांच के बाद दोषी मिले प्रभारियों पर विभागीय कार्रवाई एवं उनसे रिकवरी की चेतावनी दी थी। इसके लिए स्कूलों की सूची बीएसए से पूर्व में ही तलब की जा चुकी है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2008-09 से परिषदीय स्कूलों का विद्युतीकरण कराए जाने की योजना लाई गई थी। इसके तहत अब तक जिले के 1254 स्कूलों को चिन्हित किया जा चुका है। इस कार्य के लिए प्रति विद्यालय 25188 रुपए का बजट दिया गया था। खींचतान के चलते प्रभारी शिक्षक के बजाय अन्य योजनाओं की ही तरह इसे भी कई ब्लाकों में एबीएसए स्तर से ही पूरा कराया गया। प्रभारी शिक्षक को केवल चेक पर हस्ताक्षर करने का ही अधिकार दिया गया था। विशिष्ट बीटीसी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह के अलावा और भी कई शिक्षक नेताओं ने योजना के धन में भारी पैमाने पर घालमेल की शिकायत उच्चस्तर पर की थी। अमर उजाला ने भी संबंधित खबरों का प्रमुखता से प्रकाशन किया था। जिला समन्वयक निर्माण कौशलेंद्र कटियार की मानें तो वर्ष 2008-09, 2009-10 के स्वीकृत 1183 स्कूलों में विद्युतीकरण पूरा कराया जा चुका है, लेकिन कुछेक को छोड़ दें तो शायद किसी स्कूल में बच्चों ने रोशनी देते बल्ब देखें हों। इसका कारण यह रहा कि पहले विद्युतीकरण में देर हुई और फिर कनेक्शन के लिए विभाग ने बहुत देर की। करीब तीन सैकड़ा से अधिक विद्यालय ऐसे भी हैं जिनके लिए स्थापित किए गए ट्रांसर्फामर सत्यापन के बाद कहीं और लगा दिए गए।
एडी बेसिक कार्यालय के अनुसार बुधवार को विद्युतीकरण कार्य में प्रयोग की सामग्री और सत्यता की जांच करने के लिए टीम उन्नाव में होगी।


सभी संतृप्त स्कूलों की होगी जांच
एडी बेसिक महेंद्र सिंह राणा की मानें तो उन्हें कई जिलों से विद्युतीकरण में लापरवाही की शिकायत मिली है। इसी के आधार उन्नाव से विद्युतीकरण हो चुके स्कूलों की सूची मांगी गई है। टीम प्रयोग की गई सामग्री की क्वालिटी व क्वांटिटी की जांच कर रिपोर्ट भेजेगी। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के साथ ही रिकवरी कराए जाने की बात कही।

कब कितने स्कूल हुए स्वीकृत
वर्ष विद्यालय
2008-09 796
2009-10 387
2010-11 71

ऐसे हुआ है खेल
विद्युतीकरण के लिए चयनित स्कूलों के प्रभारी शिक्षकों के खाते में इस मद का 25188 रुपया भेजा गया। इसके बाद कुछ ब्लाकों में अनाधिकृत रूप से प्रभारियों को दबाव में लिया गया कि स्वयं काम कराने की स्थिति में उनके कार्य का सत्यापन नहीं किया जाएगा। आलम यह रहा कि अधिकांश स्कूलों में आठ से दस हजार में ही काम करा दिया गया। स्विच, साकेट, सीलिंग फैन, बोर्ड, सीट आदि मानक के विपरीत लगा दिए गए।

बचने के हैं रास्ते फिर भी बना है डर
उच्चस्तरीय जांच की भनक लगने के बाद अब प्रभारी शिक्षकों को बचाव के भी रास्ते सुझाए जा रहे हैं। वे प्रभारी शिक्षकों को सीलिंग फैन आदि चोरी हो जाने के प्रमाण तैयार कर लेने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि जांच टीमें सीलिंग फैन, स्विच व साकेट आदि की ही क्वालिटी व कंपनी देखेगी। ऐसे में जब सामान ही नहीं होगा तो फंसने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन उन्हें यह भी डर है कि जांच टीम ने यदि वायरिंग की स्थिति, प्रयोग किया गया तार, सीट की क्वालिटी आदि देखने की जहमत उठा ली तो भ्रष्टाचार की पर्तें तत्काल ही खुलने लगेंगी। अर्थिंग भी शायद ही किसी स्कूल में कराई गई हो।

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