अब डाकघर को देना होगा हर्जाना

Unnao Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। खाता खुलवाने व राशि जमा करने के बाद भी भुगतान में लापरवाह पर उपभोक्ता फोरम ने डाकघर प्रशासन को हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। डाकघर प्रशासन खाताधारक को 10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति व एक हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में देगा। फोरम ने माना डाकघर अधिकारियों ने तीन वर्ष में भी जांच पूरी नहीं की। इसलिए यह सेवा में लापरवाही है।
सफीपुर तहसील के पोस्ट मुड़हा के ग्राम रूपपुर चंदेला की रामदुलारी पुत्री स्व. रामप्रसाद व रीतू पुत्री भोलाशंकर ने कस्बे के ही डाकघर शाखा में आवर्ती जमा योजना के तहत खाता खुलवाया था। खाते में उन्होंने 5 हजार रुपए जमा किए। 30 जुलाई 2004 को उन्हें पास बुक मिल गई। उन्होंने 3 जून 2008 को आखिरी किस्त भी जमा कर दी। किस्तें पूरी होने के बाद रामदुलारी ने शाखा इंचार्ज से भुगतान के लिए संपर्क किया। 29 अगस्त 2008 को शाखा अधिकारी ने यह कहकर पासबुक जमा करा ली कि प्रधान डाकघर, उन्नाव से आख्या आने पर भुगतान किया जाएगा। इसके बाद रामदुलारी लगातार डाकघर प्रशासन से संपर्क करती रहीं लेकिन भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने नोटिस भी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हारकर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में परिवाद योजित किया। फोरम में डाकघर सफीपुर व उन्नाव के अधिकारियों ने खाते खोलना स्वीकार किया। विपक्षियों ने प्रतिवाद किया कि आवर्ती जमा खाते पांच वर्ष तक की अवधि के लिए खोले जाते हैं। परिवादी के खाते की परिपक्वता तिथि 29 जुलाई 2009 थी। खाते में कुछ गड़बड़ी है। उसकी जांच अंतिम चरण में है इसलिए परिवाद खारिज किए जाने योग्य है।
फोरम अध्यक्ष पीयूष कुमार व सदस्या सुधा यादव ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया कि धनराशि देने में विपक्षियों ने लापरवाही की जिससे परिवादी को राशि की हानि उठानी पड़ी। इसलिए फोरम ने पीड़ित को 10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति व 1 हजार रुपए परिवाद व्यय के रुप में देने के आदेश डाकघर प्रशासन को दिए।


साढ़े तीन वर्ष बाद भी नहीं पूरी हो सकी जांच
उन्नाव। मामले की सुनवाई करते समय फोरम ने माना कि पीड़ित ने परिवाद पत्र में जो तथ्य कहे हैं वह असत्य प्रतीत होता है। यह खाता 30 जुलाई 2004 को खोला गया था। इसकी अवधि पांच वर्ष थी। जबकि परिवादी ने 29 अगस्त 2008 को भुगतान के लिए पासबुक जमा करना बताया जोकि संभव नहीं था। विपक्षीगण का भी आचरण ठीक नहीं था। क्योंकि 29 जुलाई 2009 को यह खाता परिपक्व हो गया था उसके बाद डाकघर प्रशासन को भुगतान कर देना चाहिए था। ग्राहक ने 2 दिसंबर 11 को परिवाद योजित किया था। पास बुक 29 अगस्त 2008 को जमा कराई और प्रतिवाद पत्र 30 जनवरी 2012 को दाखिल किया गया। डाकघर प्रशासन ने साढ़े तीन साल बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं की। यह सेवा में घोर लापरवाही है।

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