बाढ़ के खौफ से नहीं बोई फसल

Unnao Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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सफीपुर। बारिश के आगमन के साथ तहसील के क्षेत्रवासियों पर खौफ तारी होने लगा है। दो वर्षों से लगातार बाढ़ का पानी घरों से लेकर खेती तक तबाह कर चुका है। नतीजतन अस्सी प्रतिशत लोग खरीफ की फसल बोने की हिम्मत नहीं जुटा सके, जबकि अब गृहस्थी बचाने की जुगत में हैं।
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तहसील क्षेत्र की परगना सफीपुर, फतेहपुर चौरासी व गंजमुरादाबाद तक गंगा व सई नदी का उफान कहर बनकर हजारों एकड़ भूमि को तहस नहस कर देता है। गत वर्षों में गांव के गांव सैलाब की चपेट में आकर मैदान बन गए। लोगों के पास अनाज के साथ ही घर भी नहीं बचे थे। यह लोग स्कूलों और सरकारी इमारतों में बनाए गए शिविरों में रहने को विवश थे। इसके बाद तिनका तिनका जोड़कर बनाए गए आशियाने को बचाए रखने को लेकर फिर चिंतित हैं। इसी का नतीजा रहा कि कटरी के रहने वाले खरीफ की फसल बोने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उनका कहना था कि महंगा बीज और खाद आदि डालने के बाद आखिर उसे बाढ़ में बरबाद ही होना है।
आखिर नहीं बन सका बांध
सफीपुर। क्षेत्र को बाढ़ से बचाने की सरकारी कवायद इस वर्ष भी कागजी कार्यवाही में उलझकर रह गई है। जिस तरह परियर में गंगा बैराज से बांध बनाकर पानी को रोक लिया गया है इसी तरह परियर से सफीपुर, गंजमुरादाबाद तक बांध बनाने की भी योजना थी। तहसील प्रशासन ने तत्काल ही नक्शा बनाकर जिला प्रशासन को सौंप दिया। सूत्रों की मानें तो धन आवंटन भी हो गया पर योजना को अमली जामा पहनाने की कोशिश नहीं हुई। लोगों का मानना है कि अब तो इस योजना पर काम बरसात के बाद ही प्रारंभ हो सकेगा।

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एक क्षेत्र को बचाने में आती है बाढ़
सफीपुर। शुक्लागंज और उसके आगे के क्षेत्र को बचाने के प्रयास में ही चालीस किलोमीटर का क्षेत्रफल जलमग्न हो जाता है। इस दर्द के चलते कटरीवासी अधिक पानी न रोके जाने की मांग कर रहे हैं। इनका मानना है कि गंगा बैराज पर बना बांध आगे बढ़ने वाले पानी की गति को इतना धीमा कर देता है कि पानी परियर से गंजमुरादाबाद तक फैल जाता है।

बाढ़ में मिलेगा स्वच्छ पानी
सफीपुर। बाढ़ की आशंका से प्रशासन ने अपनी व्यवस्था को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। ग्राम सभावार समितियां गठित कर डूबते व्यक्ति को बचाने के लिए रस्सा आदि फेंकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नाव और डोंगे तैनात करने के साथ ही प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए हैंडपंपों को जमीन से दस फिट ऊंचा करने की व्यवस्था की है।
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