आलू ने दिखाई अकड़, टमाटर हुआ लाल

Unnao Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। पहले बारिश में देरी फिर चार दिन झमाझम बारिश ने सब्जियों के खेत तबाह कर दिए। इसके कारण हरी सब्जियों के दामों में दो गुना इजाफा हो गया है। इसकी वजह से हर मौसम में हाजिर सब्जियों का राजा
आलू अकड़ गया है और टमाटर के तेवर लाल हो गए हैं। सब्जी मंडी में हालात यह हैं पांच रुपए में मारा-मारा फिरने वाला कद्दू 18 रुपए में बिक रहा है। आम आदमी की थाली से सब्जी की कटोरी गायब होने से खाना बेस्वाद हो चला है।
अषाढ़ में पहले बारिश नहीं होने से पहले बोए गए खेत सूख गए। रही सही कसर सावन में लगातार चार दिन हुई बारिश ने पूरी कर दी। किसानों ने दिन में दो-दो बार सिंचाई कर जैसे तैसे सब्जी की फसल तैयार की थी। पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिससे पौधे बेकार हो गए। उत्पादन घटने से बाजार में सब्जी की आवक काफी घट गई है। इसका सीधा असर सब्जियों के दामों में पर पड़ा है। लौकी, तरोई, कद्दू, बैंगन सहित अन्य हरी सब्जियों के दाम डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। इसके साथ आम आदमी की थाली की शान आलू और टमाटर ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिया है। टमाटर 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह आलू 15-18 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। अब लोग केवल आधा और पाव भर ही सब्जी खरीदकर काम चला रहे हैं।


पिछले वर्ष सड़ा था टनों आलू
उन्नाव। पिछले वर्ष जिले में तीन लाख 15 हजार एमटी आलू की रिकार्ड पैदावार हुई थी। इससे उस समय हालत यह हो गई थी कि शीतगृहों में रखने की जगह नहीं थी। किसानों ने माटी मोल बिक रहे आलू की दुर्दशा देखकर इसे कोल्डस्टोरेज से उठाने से इंकार कर दिया। इसके बाद शीतगृह संचालकों ने आलू को बाहर फेंक दिया था। इस बार आलू ने लोगों को रुला दिया है।
ग्रामीण और शहरी बाजारों में वर्तमान में आलू 15 से 18 रुपए में बिक रहा है। आलू की फसल में तगड़ा नुकसान होने पर इस बार किसानों ने काफी कम मात्रा में आलू की बुआई की थी। वर्ष 2011-12 में जिले में 10 हजार मीट्रिक टन आलू बुआई का लक्ष्य था। 2 लाख 45 हजार एमटी उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन झुलसा रोग की मार से करीब 26 फीसदी आलू की फसल बर्बाद हो गई। इस कारण इस साल 2 लाख 3 हजार एमटी का ही उत्पादन हुआ। वर्तमान समय में आलू आम आदमी का बजट प्रभावित का रहा है। किंतु इस बार दाम अभी से आसमान छूने लगे हैं। प्रभारी उद्यान अधिकारी आरबी वर्मा के मुताबिक, झुलसा रोग लगने से आलू की फसल बर्बाद हुई। वहीं पिछले साल जिन किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था उन्होंने इस बार बुआई नहीं की जिसका भी प्रभाव पड़ा। वर्ष 2012-13 में किसानों ने 9 हजार हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार एमटी उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 1 अक्टूबर से बुआई शुरु होगी। नवम्बर से बाहर का आलू आने लगेगा जिसके बाद ही कीमतों में कमी आने की संभावना है।



आलू का भाव बढ़ने से किसान खुश
अचलगंज (उन्नाव)। तीन साल से मंदी की मार झेल रहे किसान इस बार शुरूआती दौर में ही उपज का सही मूल्य मिलने से खुश दिखाई दे रहे हैं।
जून में ही शीतगृहों के पट खुलते ही किसानों की पौ-बारह होने लगी। समय से एक माह लेट शुरू हुई बरसात के बावजूद आलू का भाव नहीं गिरा बल्कि दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इससे बाजारों में आलू का फुटकर बिक्री मूल्य 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य भले ही न मिल पा रहा हो परंतु गुरुवार को आहूजा कोल्ड स्टोर कोरारी कला में किसानों की आलू की जमकर बिकवाली हुई। 3797 नंबर आलू 1250 रुपए से 1300 रुपए प्रति कुुंतल, चिप सोना (शुगर फ्री) 1500 रुपए प्रति कुुंतल, श्रीनाथ 1350 से 1400 रुपए प्रति कुंतल तथा सिंदूरीलाल 1300 से 1350 रुपए प्रति कुंतल में खरीदी और बेची गई। आलू व्यापारी मो. अनवर, राजू टेलर तथा मो. रईस ने बताया कोल्ड स्टोरेज में
आलू भरा है। लेकिन तेजी को देखते हुए किसान आलू के भाव और चढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। ब्यूरो


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