दौ सौ से अधिक विद्यालय शिक्षक विहीन

Unnao Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो गया है लेकिन इस वर्ष भी जिले भर के परिषदीय स्कूलों में से दो सौ से अधिक विद्यालय अब भी शिक्षक विहीन हैं। यह सभी प्राथमिक स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे संचालित हैं। वहीं काफी विद्यालय तो शिक्षकों की कमी से बंद पड़े हैं।
शिक्षकों की कमी से इस वर्ष भी शिक्षण कार्य प्रभावित होने के आसार दिख रहे हैं। हालात यह हैं कि जिले भर में दो सौ से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जो अभी भी शिक्षामित्रों के सहारे हैं। कई विकासखंडों में अभी भी स्कूलों में ताले लटक रहे हैं। हालत यह है कि शिक्षामित्र न तो एमडीएम में कुछ हस्तक्षेप कर सकते हैं और न ही अपने ही मानदेय में। फलस्वरूप कितने ही विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को मानदेय तक के लाले हैं। बेरोजगारी से जूझ रहे इन न्यूनतम आय वाले अंशकालिक कर्मियों को बिना मानदेय कार्य करना भारी पड़ रहा है। एक दर्जन से अधिक स्कूलों में ताले लटकने से सरकार का सर्व शिक्षा अभियान का सपना पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। कई गांवों के बच्चे स्कूल जाने से वंचित हैं। पिछले सत्र में भी स्थिति नाजुक रही और इस वर्ष भी इसमें सुधार होते नहीं दिख रहा।
बेसिक शिक्षाधिकारी डा. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष कई शिक्षकों का रिटायरमेंट हो गया है। पहले से ही शिक्षकों की कमी है। यह तो नहीं कह सकता कि सभी विद्यालय खुलवा सकेंगे लेकिन प्रयास पूरा करेंगे। बीएसए ने रुके मानदेय वाले शिक्षामित्रों से 14 जुलाई तक का समय दिया है। शिक्षामित्र इस तिथि तक जिस कारण से उनका मानदेय रुका हुआ है से पहले अपने खंड शिक्षधिकारी को अवगत कराएंगे। यदि उनके स्तर पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती है तो वह उन्हें (बीएसए को) अवगत कराएं।

चार वर्ष से नहीं मिला मानदेय
नवाबगंज ब्लाक के पकरिगंवा प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र संजय मिश्रा और सुनीता को चार वर्ष से मानदेय नहीं मिल सका है। इन्होंने विभागीय अधिकारियों की परिक्रमा में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन अपने प्रभाव के चलते बीईओ ने यहां पर न ही किसी शिक्षक की नियुक्ति की और न ही शिक्षामित्रों का पारिश्रमिक ही दिलाया। संगठन के माध्यम से जब बात बढ़कर बीएसए तक पंहुची तो अब वे ग्राम प्रधान को इसका दोषी बता रहे हैं। इस अवधि में शिक्षामित्र संजय मिश्रा ने बहन की शादी भी कर्ज लेकर की।
बीईओ रंगनाथ चौधरी का इस मामले में कहना है कि ग्राम प्रधान से दो बार कहा लेकिन उसने शिक्षक के आने के पूर्व चेक पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जब इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने की बात पूछी गई तो एक दिन पहले ही शिक्षामित्र को चेक दे दिए जाने की बात कही।
बीते वर्ष सितंबर में शिक्षा विभाग ने रिक्त पदों को भरने के लिए समायोजन किया था। इसकी सूची बीईओ रंगनाथ चौधरी से मांगी गई थी। कुछ शिक्षक गैर ब्लाकों से भी स्थानांतरित किए गए थे लेकिन आलम यह रहा कि कई स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक पदस्थापित किए गए तो कुछ शिक्षक विहीन ही रह गए। इन्हीं में से पकरिगंवा प्राथमिक स्कूल भी एक रहा। यहां चार वर्ष से कोई शिक्षक नहीं तैनात है।

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