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भ्रष्ट शिक्षकों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज

Unnao Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। जिले के परिषदीय स्कूलों में कराए गए विद्युतीकरण की जांच होगी। इसमें किए गए भ्रष्टाचार की भनक एडी बेसिक को लग चुकी है। जांच के बाद दोषी मिले प्रभारियों पर विभागीय कार्रवाई तो होगी ही, उनसे रिकवरी भी की जाएगी। इसके लिए विद्युतीकरण में आए खर्च का ब्योरा और स्कूलों की सूची बीएसए से तलब की जा चुकी है।
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गरीब छात्रों को स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए एक- एक कर योजनाएं लाई जा रही हैं। सर्वशिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2008-09 से परिषदीय स्कूलों का विद्युतीकरण कराने की योजना लाई गई थी। इसके तहत अब तक जिले के 1254 स्कूलों को चिन्हित किया जा चुका है। इस कार्य के लिए प्रति विद्यालय 25188 रुपए का बजट दिया गया था। योजना को लेकर शुरू से ही खींचतान चल रही थी। अन्य योजनाओं की ही तरह इसे भी कई ब्लाकों में प्रभारी शिक्षक के बजाय एबीएसए स्तर से ही पूरा कराया गया। प्रभारी शिक्षक को केवल चेक पर हस्ताक्षर करने का ही अधिकार दिया गया था। जिला समन्वयक निर्माण कौशलेंद्र कटियार की मानें तो वर्ष 2008-09, 2009-10 के स्वीकृत 1183 स्कूलों में विद्युतीकरण कराया जा चुका है जबकि वर्ष 2010-11 के स्वीकृत स्कूलों का अभी सत्यापन नहीं हुआ है। यह कार्य स्कूल खुलने के साथ ही पूरा कर लिया जाएगा। इस कार्य में धांधली की शिकायतों को संज्ञान में लेकर अब एडी बेसिक की टीमें जांच करेंगी।

सभी संतृप्त स्कूलों की होगी जांच
एडी बेसिक महेंद्र सिंह राणा की मानें तो उन्हें कई जिलों से विद्युतीकरण में लापरवाही बरते जाने की शिकायत मिली है। इसी के आधार उन्नाव से विद्युतीकृत हो चुके स्कूलों की सूची मांगी गई है। टीम प्रयोग की गई सामग्री की क्वालिटी व क्वांटिटी की जांच कर रिपोर्ट भेजेगी। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के साथ ही रिकवरी कराए जाने की बात कही। श्री राणा ने लगभग सभी संतृप्त विद्यालयों की जांच कराए जाने की बात कही।
कब कितने स्कूल हुए स्वीकृत
वर्ष 2008-09 796 विद्यालय
वर्ष 2009-10 387 विद्यालय
वर्ष 2010-11 71 विद्यालय


ऐसे हुआ खेल
विद्युतीकरण के लिए चयनित स्कूलों के प्रभारी शिक्षकों के खाते में इस मद का 25188 रुपया भेजा गया। इसके बाद कुछ ब्लाकों में बीआरसी स्तर से प्रभारियों को दबाव में लिया गया कि स्वयं काम कराने की स्थिति में उनके कार्य का सत्यापन नहीं किया जाएगा। कुछ निडर शिक्षकों ने इसका विरोध किया तो उन्हें दूसरा रास्ता बता दिया गया। आलम यह रहा कि अधिकांश स्कूलों में आठ से दस हजार में ही काम पूरा करा दिया गया। स्विच, साकेट, सीलिंग फैन, बोर्ड, सीट आदि सभी सामान मानक के विपरीत लगा दिए गए।
बचने के भी तो हैं रास्ते
जांच की स्थिति में प्रभारी शिक्षकों को बचाव के भी रास्ते सुझाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त रहे लोग ही अब ऐसे शिक्षकों को सीलिंग फैन आदि चोरी हो जाने के प्रमाण तैयार कर लेने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि जांच टीमें सीलिंग फैन, स्विच व साकेट आदि की ही क्वालिटी व कंपनी देखेगी। ऐसे में जब सामान ही नहीं होगा तो फंसने का सवाल ही नहीं।
फिर भी फंस सकते हैं
एक कहावत है कि चोर चाहे जितनी सावधानी से चोरी करे कुछ न कुछ सुबूत अवश्य छोड़ जाता है। कुछ ऐसा ही विद्युतीकरण मामले में संभव है। जांच टीम ने यदि वायरिंग की स्थिति, प्रयोग किया गया तार, सीट की क्वालिटी आदि देख लिया तो भ्रष्टाचार की पर्तें खुलने लगेंगी। अधिकांश स्कूलों में लोकल व 1 एमएम का तार ही प्रयोग किया गया है। जबकि मानक 2 एमएम आईएसआई तार लगाए जाने का था। सुरक्षा की दृष्टि से कराई जाने वाली अर्थिगिं भी शायद ही किसी स्कूल में कराई गई हो।
नहीं हो सकी रोशनी
परिषदीय स्कूलों में विद्युतीकरण तो पूरा हो गया लेकिन कुछेक को छोड़ दें तो शायद किसी स्कूल में बच्चों ने रोशनी देते बल्ब देखें हों। इसका कारण यह रहा कि पहले विद्युतीकरण में देर हुई और फिर कनेक्शन के लिए विभाग ने बहुत देर की। करीब तीन सैकड़ा से अधिक विद्यालय ऐसे भी हैं जिनके लिए स्थापित ट्रांसर्फामर सत्यापन के बाद कहीं और लगा दिए गए।

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