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अब चलेगा शिक्षा का हक अभियान

Unnao Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम अब पूरी तरह से प्रभावी होगा। इसके प्रावधानों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए शासन ने शिक्षा का हक अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अभियान को सफल बनाने के लिए मुख्य सचिव उप्र शासन ने मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों के साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेशित किया है।
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राज्य परियोजना निदेशक अतुल कुमार की ओर से भेजे गए शासनादेश के मुताबिक जनपद स्तर पर जिला वर्किगिं ग्रुप का गठन शिक्षा का हक के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों के क्रियान्वयन व अनुश्रवण सुनिश्चित करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में एक जिला वर्किगिं ग्रुप का गठन किया जाएगा। इसके सचिव बेसिक शिक्षा अधिकारी होंगे।
यह ग्रुप निर्धारित प्रक्रिया के बाद प्रति ब्लाक 30 वालंटियरों के माध्यम से अभियान के उद्देश्यों को पूरा करेगा। ब्लाक स्तर पर कमेटी में बीईओ, एबीआरसी व एनपीआरसी होंगे, जबकि वालंटियरों के चयन में बीडीओ को भी जिम्मेदारी दी गई है। बीएसए डा. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षा का हक अभियान जिले में पूरी तरह से प्रभावी होगा। इससे आरटीई का प्रभावी रूप से अनुपालन भी होगा।


ऐसे गठित होगी जिला समिति
इस समूह में जिले के सक्रिय स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि , विश्वविद्यालय/कालेजों के प्रवक्ता, महिला समाख्या, यूनीसेफ, केयर इंडिया आदि के प्रतिनिधियों एवं जिला समन्वयक को इस समिति में सम्मिलित किया जाएगा। यह ग्रुप नियमित रूप से बैठक कर शिक्षा का हक अभियान के क्रियान्वयन की रणनीति तैयार कर शिक्षा दलों को मार्गदर्शन देगा। जिला वर्किगिं ग्रुप ही इन दलों की प्रगति की समीक्षा भी करेगा। इसके अलावा ब्लाक स्तरीय चयन समिति में खंड शिक्षाधिकारी अध्यक्ष, वरिष्ठतम एबीआरसी सचिव और एनपीआरसी सदस्य होंगे।

ब्लाक चयन समिति की जिम्मेदारी
ब्लाक स्तर पर तैयार की गई वालंटियरों की सूची को अंतिम रूप देने से पहले इच्छुक व्यक्तियों को एक बार बीआरसी पर बुलाकर यह बता दिया जाए कि उनके दायित्व क्या हाेंगे, कितना समय उन्हें इस कार्य के लिए देना होगा। इसके बाद सहमति मिलने पर चयन प्रक्रिया पूरी की जाए। चयनित सदस्यों की सूची बीएसए को बीडीओ के माध्यम से अग्रसारित की जाएगी।


वालंटियर बनने की यह होंगी शर्तें
स्थानीय निवासी होने के साथ महिलाओं को प्राथमिकता।
आवश्यकता पड़ने पर कहीं भी जाना पड़ सकता है।
बिना किसी पारिश्रमिक के अपना योगदान देने के इच्छुक हों।
स्थानीय स्तर पर सक्रिय स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि हो सकते हैं।
स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि हों।
स्वयं सेवी कार्यकर्ता, बीडीसी सदस्य या ग्राम पंचायत सदस्य हों।
न्यूनतम इंटरमीडिएट पास और 25 से 45 आयु वर्ग में हों।


वालंटियरों की जिम्मेदारियां
अभियान के क्रियान्वयन में सहयोग के लिए प्रत्येक ब्लाक पर तीस वालंटियर का चयन किया जाना है। यह अपने से संबंधित विकास खंड की गतिविधियों में प्रतिभाग करेंगे। चयन प्रक्रिया को स्वच्छ रखने के लिए प्रत्येक न्यायपंचायत स्तर से तीन प्रतिनिधि चयनित किए जाएंगे। यही लोग अपनी न्याय पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगे। चयन के उपरांत वालंटियरों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए एक किट दी जाएगी। इस किट में मानीटरिंग प्रपत्र के साथ प्रचार-प्रसार सामग्री भी होगी।
चयन प्रक्रिया
वालंटियर बनने के लिए संबंधित बीडीओ को आवेदन दिया जाएगा। प्राप्त आवेदनों पर विचार कर ब्लाक स्तरीय चयन समिति वालंटियरों का चयन करेगी। इसके लिए जिला वर्किगिं कमेटी कोई भी प्रक्रिया अपना सकती है। वह पोस्टर या पंपलेट के माध्यम से प्रचार कर, रैली, नुक्कड़ सभा के माध्यम से प्रचार कर, ब्लाक स्तर पर स्वैच्छिक संगठनों या स्वयं सेवियों का एक दिवसीय सेमिनार कर, विज्ञापन के माध्यम से प्रचार प्रसार कर जानकारी दे सकती है।

यह होंगे वालंटियरों के दायित्व
चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद उन्हें ब्लाक स्तर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद 3-3 वालंटियर के 10 दल बनाए जाएंगे। यह शिक्षा दल अपने ब्लाक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का भ्रमण कर निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं एकत्रित कर आख्या प्रस्तुत करेंगे। यह आख्या बीडीओ के पास संकलित की जाएगी और बाद में जिला वर्किगिं ग्रुप को प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद ही अगली कार्यवाही की जाएगी।

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