छात्रवृत्ति घोटाले में बैंक मैनेजर, वीडीओ गिरफ्तार

Unnao Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। फर्जी विद्यालयों के नाम पर 24 लाख रुपए की छात्रवृत्ति का गबन करने वाले मास्टर माइंड की निशानदेही पर सोमवार को पुलिस विभाग के विशेष जांच प्रकोष्ठ (एसआईएस) ने फतेहपुर जिले में तैनात बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी फर्जीवाड़े में शामिल एक ग्राम विकास अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया है। शाखा प्रबंधक ने 2006 में घोटाले के मास्टर माइंड का फर्जी आईडी पर बैंक में खाता खुलवाया। जबकि वीडीओ ने फर्जी ड्राफ्ट बनवाने और उसका भुगतान कराने में अहम भूमिका निभाई। एसआईएस की चार टीमें कई और अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं।
वर्ष 2005 से 2008 तक जिले में छात्रवृत्ति वितरण के नाम पर 49 लाख का घोटाला हुआ। इसमें से फर्जी स्कूलों और उनके फर्जी प्रबंधकों के नाम से खाते खोले गए। फर्जीवाड़ा करने वालों ने 24 लाख रुपए डकार लिए। कागजों पर स्कूल खोले गए और बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जी प्रमाणपत्र और आईडी पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से खाते भी खोले गए। इनके जरिए हजारों छात्रों के नाम पर 24 लाख रुपए डकार लिए गए। जिला समाज कल्याण अधिकारी राकेश रमन की जांच में शासकीय धन के गबन का पता चला। विभाग ने जिन दो विद्यालयों को छात्रवृत्ति जारी की वास्तव में वह खोले ही नहीं गए। पता चला कि बैंक आफ बड़ौदा में आवास विकास कालोनी के भारतीय विद्या शिक्षा सदन के प्रबंधक जीवन लाल के नाम पर फर्जी खाते खोले गए। जिला समाज कल्याण अधिकारी राकेश रमन ने अगस्त 2009 में सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया।
बीते बुधवार को एसआईएस प्रभारी सै. रियाज अहमद ने फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के परियर गांव निवासी सौरभ दीक्षित उर्फ कपोल को गिरफ्तार कर लिया। सौरभ की निशानदेही पर सोमवार को टीम ने बैंक आफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक जफर आलम को शहर की संगम कालोनी से गिरफ्तार कर लिया। एसआईएस प्रभारी सै. रियाज अहमद के मुताबिकजफर आलम मौजूदा समय में बैंक की फतेहपुर मुख्य शाखा में तैनात है। टीम ने देर शाम बांगरमऊ में तैनात ग्राम विकास अधिकारी श्रीमन लाल को गिरफ्तार कर लिया। लाल इससे पहले बिछिया और सरोसी ब्लाक में भी तैनात रह चुका है। आरोप है कि इस वीडीओ ने शासकीय धन का गबन करने वाले रैकेट से साठगांठ की और पद का लाभ उठाते हुए फर्जी ड्राफ्ट बनवाने और उसके भुगतान में अहम भूमिका निभाई। आरोपी मैनेजर सोमवार को संगम कालोनी में किसी से मिलने आया था। मुखबिर की सूचना पर उसे गिरफ्तार किया गया और सीजेएम कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। एसआईएस प्रभारी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर उसे रिमांड पर लिया जाएगा। उनके मुताबिक फर्जीवाड़े में बेसिक शिक्षा विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। कई ड्राफ्टों का भुगतान तत्कालीन पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर युक्त संस्तुुति पत्र पर किया गया था।

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