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आखिर कहां जाए शहर का गंदा पानी

Unnao Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। तीन लाख से अधिक की आबादी के बावजूद शहर में ड्रेनेज सिस्टम की सुचारु व्यवस्था नहीं है। हर नगर पालिका चुनाव के दौरान जलभराव की समस्या जोरशोर से उठाई जाती है। चुनाव के समय तो नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन वोट पड़ते ही सबकुछ भूल जाते हैं। नेताओं की वादाखिलाफी का खामियाजा भुगतती है बेचारी जनता। बारिश के पहले होने वाले निकाय चुनाव में इस बार फिर जलभराव अहम मुद्दा है। वोट मांगने वाले पुराने वादे दोहरा रहे हैं लेकिन समस्या से शहर को निजात कैसे मिलेगी, यह वे नहीं बताते हैं।
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शहर में जलनिकासी की व्यवस्था 50 साल पुराने सिस्टम के सहारे चल रही है। तब शहर की आबादी कम थी। मोहल्लों का पानी आसपास बने तालाबों में जाता था। कल्याणी व आसपास के मोहल्लों का पानी कल्याणी तालाब, गांधीनगर, आदर्श नगर आदि का पानी सत्ती तालाब सहित क्वेटा तालाब और अन्य में जाता था। आबादी बढ़ी तो तालाब पाटकर घर बनने शुरु हो गए। वर्तमान समय में शहर के ज्यादातर तालाब पाटे जा चुके हैं। वर्षोें पुरानी ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इसके कारण शहर में जलनिकासी की समस्या खड़ी हो गई है। नई बस रही शिवनगर, बन्धूहार, कब्बाखेड़ा, जुराखनखेड़ा, इन्द्रानगर आदि बस्तियों में भी जलनिकासी की सुचारु व्यवस्था नहीं है। इससे बारिश तो दूर गर्मी व ठंड के मौसम में भी गलियों में जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है। जनजनप्रतिनिधि भी जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं कर रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा शहर में अभी तक सीवर लाइन नहीं डाली जा सकी है। लोगों ने घरों में टैंक बना रखे हैं। नगर पालिका चुनाव में किसी भी प्रत्याशी ने जलभराव को अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है।
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