कराहते किसानों पर 16 करोड़ की मार

Unnao Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। महंगाई से कराह रहे किसानों पर सरकार ने डीएपी की बोरी पर 295 रूपए की मूल्यवृद्धि का अतिरिक्त बोझ लाद दिया है। इससे वाजिब समर्थन मूल्य न मिलने और क्रय केंद्रों पर बिचौलियों के हावी होने से जैसे तैसे परिवार पाल रहे किसानों के लिए अब दो जून की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा। लागत का मूल्य निकालने के बाद किसानों के हाथ केवल भूसा आता था, अब वह भी लागत में ही खप जाएगा।
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जिले में खरीफ में आठ हजार मीट्रिक टन और रबी में 25 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरुरत पड़ती है। फिलहाल प्रशासन के पास छह हजार मीट्रिक टन खाद का स्टाक है। इस हिसाब से 27 हजार मीट्रिक टन डीएपी किसानों को बढ़े दाम पर मिलेगी। 295 रुपए प्रति बोरी की बढ़ोत्तरी होने से सोलह करोड़ से अधिक का भार किसानों पर पड़ेगा। डीएपी के दाम बढ़ाने वाली सरकार न तो जिंसों पर समर्थन मूल्य लागत के हिसाब से बढ़ाती है और न कृषि उपज विपणन की माकूल व्यवस्था करती है।
जिले की मुख्य उपज गेहूं का समर्थन मूल्य 1285 रुपए प्रति कुंतल रखा गया। विपणन के लिए 71 क्रय केंद्र खोलने की घोषणा की गई। इसमें दो केंद्र खुले ही नहीं। जो केंद्र चल रहे थे उनमें किसानों की जगह बिचौलियों और दबंगों से ही खरीद की जा रही थी। सीएम ने दौरा किया तो कुछ हालात सुधरे लेकिन शतप्रतिशत किसानों का भला नहीं हो पाया। छोटे और मझोले किसान खुले बाजार में 900 से 1000 प्रति कुंतल के बीच गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में प्रति बीघा (औसतन) गेहूं की उपज आठ कुंतल होती है। खुले बाजार में एक हजार के मानक के प्रति बीघा आठ हजार की पैदावार हो रही है, जबकि लागत (लेबर सहित) इससे कहीं अधिक है। ऐसे में ले-देकर किसान के पास केवल भूसा ही हाथ लगता है।
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