कर्मचारी ही नहीं तो कैसे सुधरे बिजली

Unnao Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। विद्युत विभाग में लाइनमैनों से लेकर पेट्रोलमैन और श्रमिकों तक की भारी कमी है। इससे छोटे से छोटे फाल्ट की मरम्मत में लंबा समय लग जाता है। विभागीय अधिकारी प्राइवेट गैंग के सहारे फाल्टों की मरम्मत की कवायद में जुटे रहते हैं। भीषण गर्मी में स्थिति और ज्यादा विकराल होती है।
घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र के 24 हजार उपभोक्ताओं के लिए शहर में चार सबस्टेशन और इनमें 23 फीडर हैं। किसी भी फीडर में मानक के अनुसार लाइनमैन, पेट्रोलमैन और श्रमिक नहीं हैं। यही कारण है कि शहर की बिजली व्यवस्था तार तार है। शहर के वीआईपी क्षेत्र को बिजली आपूर्ति करने वाले कब्बाखेड़ा उपकेंद्र में कुल 5 फीडर हैं। मानक के अनुसार प्रत्येक फीडर पर एक लाइनमैन, फाल्ट तलाशने के लिए दो पेट्रोलमैन और सीढ़ी ठेलिया खींचने के लिए एक श्रमिक की तैनाती आवश्यक है। कब्बाखेड़ा उपकेंद्र में 20 कर्मचारियों की आवश्यकता है लेकिन सिर्फ चार कर्मी ही तैनात हैं। मुख्य शहर के लिए सिटी पावर हाउस में कुल चार फीडरों के लिए 16 कर्मचारियों की जरूरत है मगर यहां सिर्फ आठ कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। औद्योगिक क्षेत्र मगरवारा तथा शहर के काफी बड़े क्षेत्र को बिजली आपूर्ति करने वाले कुंदनरोड सब स्टेशन में कहने को तो केवल दो फीडर हैं मगर औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही शहर भी जुड़ा होने से फाल्टों की भरमार और उनके मरम्मत का दबाव अधिक है। इसके बावजूद कर्मचारियों की कमी बरकरार है। इस फीडर में कुल 11 कर्मचारियों की आवश्यकता है लेकिन सिर्फ चार ही तैनात हैं। करीब 20 किमी क्षेत्र में सोनिक उपकेंद्र से कई इंटरनेशनल कंपनियों, शहर की आवास विकास कालोनी के अलावा चमरौली क्षेत्र को बिजली की सप्लाई की जाती है। यहां छोटे-बड़े 12 फीडर हैं। इनके लिए 48 कर्मचारियों की आवश्यकता है मगर केवल 6 ही तैनात हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते समय से फाल्ट नहीं दुरुस्त हो पाते। टूटे तारों को जोड़ने में 24 घंटे का समय लग जाता है। खराब ट्रांसफार्मर की मरम्मत दो से तीन दिन में हो पाती है। विभाग प्राइवेट कर्मियों के सहारे किसी प्रकार से फाल्टों की मरम्मत आदि कराकर आपूर्ति दुरुस्त करने की कवायद में जुटा रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में फाल्ट ठीक करने में दिक्कतें
उन्नाव। ग्रामीण इलाकों में स्थित सबस्टेशनों में भी स्टाफ की खासी कमी है। इससे गांवों की बिजली व्यवस्था तो और भी ज्यादा खराब है। बताया जाता है कि एक से दूसरे गांव के बीच की दूरी काफी है। इससे यदि कहीं तार टूटा तो उसे ढूंढने में कर्मचारियों की कमी आड़े आ जाती है। इसी प्रकार खराब ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में महीनों लगते हैं। ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर होते हैं। एक अवर अभियंता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लाइनमैनों की कमी से उन लोगों पर बहुत दबाव बढ़ जाता है। 24-24 घंटे काम करना पड़ता है। अधिकारियों व उपभोक्ताओं का समय से फाल्ट अटेंड करने का खासा दबाव रहता है। समय से न बनने पर उपभोक्ताओं की गाली भी सुननी पड़ती हैं। कभी-कभार तो मारपीट तक सहनी पड़ती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
लाइनमैनों से लेकर श्रमिकों की कमी का पत्र मुख्यालय के अधिकारियों को भेजा जा चुका है। इसके बाद भी समय पर फाल्टों की मरम्मत कराई जाती है।
संजय कुमार सिंह अधिशाषी अभियंता प्रथम

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