फोरम का फरमान, बैंक करे दो लाख की भरपाई

Unnao Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
उन्नाव। लोन चुकाने के बाद भी ट्रक खींच ले जाने पर उपभोक्ता फोरम ने बैंक को 2.05 लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति उपभोक्ता को देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बैंक को उपभोक्ता से वसूली गई अधिक धनराशि भी वापस देनी होगी। इस धनराशि पर अदायगी तिथि तक 18 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा।
विज्ञापन

दरोगाबाग निवासी राजेश तिवारी ने सिटी सेंटर कानपुर स्थित इन्डसइंड बैंक लिमिटेड से 23 जनवरी 07 को साढ़े दस लाख रुपए लोन लिया था। राजेश के अनुसार ब्याज सहित उसे 13.08 लाख 300 रुपए अदा करने थे। बैंक ने फाइनेंस के समय मार्जिन मनी के रूप में 43 हजार 43 रुपए लिए। शेष राशि का भुगतान चार साल में करना था। उन्होंने 31 दिसंबर 10 तक निर्धारित राशि से अधिक 13.44 लाख 523 रुपए का भुगतान कर दिया। इसके बाद भी बैंक ने 97 हजार रुपए वसूल लिए। रसीद 87 हजार रुपए की दी गई। पूछने पर 10 हजार रुपए गाड़ी खिंचवाने का खर्चा बताया गया। जब नोड्यूज मांगा गया तो बैंक ने 99 हजार 669.70 रुपए जमा करने को कहा।
राजेश के अनुसार 10 अप्रैल 11 को जब वह एक व्यापारी का माल लेकर वाराणसी जा रहे थे, कार्तिक आटो मोबाइल्स एन/एच मोहन सराय वाराणसी के कर्मियों ने वाहन रोक कर 1.30 लाख रुपए और जमा करने को कहा। उन्होंने 18 अप्रैल 11 को बैंक को 10 हजार रुपए देकर गाड़ी मांगी तो नहीं दी गई। छोड़ने इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। बैंक उपभोक्ता को डिफाल्टर करार दिया लेकिन फोरम में आरोप सिद्ध न कर सका। फोरम अध्यक्ष पीयूष कुमार व सदस्या सुधा यादव ने माना कि बैंक अनियमित तरीके से गलत मदों में धन उगाही कर रहा है। उपभोक्ता पूरा ऋण अदा का चुका है। वह नोड्यूज सार्टिफिकेट पाने का अधिकारी है। फोरम ने बैंक को 2.05 लाख रुपए क्षतिपूर्ति अदा करने और अधिक लिए गए 36.223 हजार रुपए लौटाने के निर्देश दिए हैं। फोरम ने इस राशि पर 1 जनवरी 11 से अदायगी तिथि तक 18 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज व 10 हजार रुपए परिवाद व्यय की राशि अदा करने के भी निर्देश दिए हैं।
दंड ब्याज राशि पूरी नहीं वसूली जा सकती
उन्नाव। फोरम का कहना है कि भारतीय संविदा अधिनियम में दंड ब्याज का उद्देश्य केवल ऋण की वसूली करना है, न की धन अर्जित करना। इसके अलावा दंड ब्याज की जो भी राशि निर्धारित होती है, वह कभी पूरी नहीं वसूली जा सकती है। उससे कम राशि देय होती है। प्रस्तुत मामले में पक्षकारों के मध्य हुई संविदा की प्रथम अनुसूची में ब्याज की दर 6.15 प्रतिशत है। सबसे नीचे दंड ब्याज की राशि 36 प्रतिशत दी हुई है। यह किसी भी दशा में निर्धारित नहीं की जा सकती है। उपभोक्ता द्वारा जो मासिक किश्त अदा की गई, उसमें मूलधन व ब्याज दोनों शामिल हैं। ब्याज की राशि पर पुन: ब्याज देय नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us