बिजली कटौती से बिलबिला रहे लोग

Unnao Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। गर्मी बढ़ने के साथ ही बेतहाशा कटौती शुरू हो गई है। विभागीय अधिकारी भले ही 17-18 घंटे बिजली का दावा कर रहे हैं लेकिन हकीकत मे ंछह घंटे भी लगातार आपूर्ति नहीं मिल रही है। भीषण गर्मी में बिजली न मिलने से न केवल लोगों के दिन का चैन और रात की नींद हराम है बल्कि कारोबार भी चौपट हो रहा है। कारोबारियों को जेनरेटर पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय में सुबह चार से छह और रात में 7 से 11 बजे तक बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। एसडीओ अनूप सक्सेना का दावा है कि 17 घंटे बिजली दी जा रही है। किंतु शहर के लोग उनके दावे को गलत साबित कर रहे हैं। बड़ा चौराहा स्थित गारमेंट्स दुकान के संचालक आशीष जायसवाल का कहना है कि सुबह तो कटौती होती ही है, फिर दोपहर में भी काट दी जाती है। जनरेटर पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। बुटीक संचालक रेनू बाला कटियार ने बताया कि आपूर्ति के समय भी बिजली आती जाती रहती है। इसके अलावा वोल्टेज की समस्या भी बनी रहती है। वोल्टेज के लो होने से इनवर्टर की बैट्रियां भी चार्ज नहीं होतीं।
सफीपुर प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय उपकेंद्र से सभी फीडरों को 15 से 18 घंटे आपूर्ति का रोस्टर है। इसके विपरीत बमुश्किल तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है। कस्बे में फोटोकापी दुकान चलाने वाले मोहम्मद शाहिद ने बताया 8 से 12 घंटे तक जेनरेटर चलाना पड़ रहा है। इससे कारोबार में कोई लाभ नहीं हो रहा है। स्वर्ण कारीगर लालता सोनी का कहना है कि भीषण गर्मी में बिजली न आने से ग्राहक दुकान में बैठना भी पसंद नहीं करते हैं। सराफा दुकानदार रमेशचंद्र ने बताया कि सहालग के मौसम में पहले से ही दिन रात काम करना होता है लेकिन बिजली न आने पर दिन में भी दुकान में बैठना मुश्किल होता है। इलेक्ट्रिक दु़कानदार रफकुल ने बताया कि बिजली कटौती के कारण उनका पूरा व्यवसाय चौपट हो गया है। बिल वितरण के नाम पर तो खिलवाड़ हो रहा है। कस्बेवासी कटौती के कारण आठ से दस घंटे तक जेनरेटर से काम चला रहे हैं। जेई काशी प्रसाद का कहना है कि व्यवस्था में सुधार के लिए ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि और जर्जर तार बदलने के लिए फाइल एमडी के यहां भेजी जा चुकी है।
बांगरमऊ प्रतिनिधि के मुताबिक रोस्टर 15 और 18 घंटे का है लेकिन चार से पांच घंटे ही बिजली आ रही है। एजेंसी संचालक शरद अग्रवाल ने बताया कि शोरूम पर ग्राहकों को सुविधा देने के लिए उन्हें आठ घंटे लगातार जेनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। किसान जयप्रकाश कटियार का कहना है कि कनेक्शन लेने के बाद भी उन्हें खेतों की सिंचाई पंपिंग सेट से ही करना पड़ रही है। राइसमिलर राहुल गुप्ता का कहना है कि उन्हें बिजली कनेक्शन लेने का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। भारी क्षमता का जेनरेटर चलाने में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्लीनिक संचालक डा. मुन्ना अल्वी ने बताया कि गर्मी में बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में बिजली न आने पर उन्हें रोशनी और मरीजों को सुविधा देने के लिए जेनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। बिल के मामले में कस्बूे के उपभोक्ता कहते हैं कि बिना मीटर के उन्हें रोस्टर के मुताबिक बिल देना पड़ता है। उपकेंद्र कर्मियों की लापरवाही के कारण उन्होंने बिल वितरण न होने की बात कही। व्यवसाइयों का कहना है कि वे पूरी तरह से जेनरेटर पर निर्भर हो चुके हैं। सहायक अभियंता का कहना है कि व्यवस्था सुधार में कुछ वक्त लगेगा। क्योंकि तार व ट्रांसफार्मर आदि बदलने में बजट चाहिए। ताजपुर निवासी गिरजाशंकर यादव, चक हनुमान निवासी बाबूलाल त्रिपाठी, कलवारी निवासी रामसजीवन यादव और हयातनगर निवासी उमेश कुमार आदि ने बताया कि ट्यूबवेल कनेक्शन लेने के बाद भी वे खेती के लिए पूरी तरह से पंपिंग सेट पर ही निर्भर हैं। इससे उन्हें दोहरी मार पड़ रही है।
पुरवा प्रतिनिधि के मुताबिक नगर और आसपास के क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति नहीं होे रही है। दुकानदार गोविंद, हारुन, अल्का ने बताया कि आपूर्ति के समय भी कई बार ट्रिपिंग होती है। इसके अलावा लो वोल्टेज भी रहता है। इससे कोई काम नहीं हो पा रहा है।

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