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रेत की फसल पर रोग का प्रकोप

Unnao Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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फल लगने के साथ ही सूखने लगी फसल
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क्रासर-
पहले बाढ़ में बर्बाद हो चुके हैं ये किसान
फसल से कर्ज चुकाने की लगाए थे उम्मीद
परियर (उन्नाव)। रेत में बोई गई खरबूजा, टिंडा आदि की फसल रोग के प्रकोप के चलते सूखने लगी है। किसानों को तगड़ा झटका लगा है। बाढ़ से खरीफ फसल बर्बाद हुए किसान जायद की इस फसल से कर्ज चुकाने की उम्मीद लगाए थे।
ज्ञात हो कि परियर क्षेत्र के मानाबंगला, कोलवा, बाबूबंगला, वंदनपुरवा सहित दर्जनों गांवों में हर साल बाढ़ से किसान बर्बाद हो जाते हैं। गत वर्ष अगस्त-सितंबर की बाढ़ में न सिर्फ इन गांवों के लोगों की फसलें बर्बाद हो गई थीं बल्कि घर में उजड़ गए थे। पानी उतरने के बाद किसानों ने तिनका-तिनका जोड़कर आशियाने बनाए और फिर कर्ज लेकर खेत बोए। ये कर्ज उतारने के लिए इन किसानों ने जायद में रेतीली भूमि पर खरबूजा, तरबूज व टिंडे की फसल बोई थी। शुरुआत में अच्छी फसल देखकर किसानों को पूरी उम्मीद थी कि वह कर्ज मुक्त हो जाएंगे। लेकिन रोग के प्रकोप से फसलें सूखने लगी हैं। किसानों ने कृषि विशेषज्ञों को बुलाकर जांच कराई, दवा भी डाली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ किसानों के तो पूरे के पूरे खेत ही सूख गए हैं।

इंसेट
फोटो नंबर-10 यूएनओपी 13,14,15: प्रतिक्रिया व्यक्त करते किसान
बिक्री का नंबर आया तो फसल हो गई खराब
परियर। कोलवा गांव के छेद्दीलाल ने संतू के साथ मिलकर पांच बीघे में तरबूज की फसल बोई थी। फसल तैयार करने में करीब 70 हजार रुपए खर्च आया। फल लगे लेकिन बढ़ना बंद हो गए। दो विशेषज्ञों से जांच कराई और उनके परामर्श से तीन हजार की दवा डाली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मानाबंगला के रामखेलावन ने दो बीघे में खरबूजा, तरबूज व टिंडा की फसल पर 20 हजार रुपए खर्च किए। मात्र 700 रुपए की उपज बेच पाए और फसल खराब होने लगी। यही हाल बाबूबंगला के भोला निषाद का है। उन्होंने एक बीघा टिंडा में 10 हजार लागत लगाई है। वंदनपुरवा के लल्लू निषाद ने 2 बीघे में खरबूजा की खेती की थी। 15 हजार की लागत लगाई थी लेकिन जब बिक्री का नंबर आया फसल खराब हो गई।
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क्षेत्र में जाकर कराएंगे जांच
संभवत: फसल में उखटा रोग (बिल्ट) लग गया होगा। इस रोग के लगने से पौधा सूखने लगता है। अमूमन लौकी, खरबूजा, तरबूजा व टिंडा की फसलों को ही यह रोग प्रभावित करता है। इसलिए किसानों को ट्राईकोडरमा दवा का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। फिर भी क्षेत्र में जाकर जांच कराई जाएगी, जो भी सहायता होगी प्रभावित किसानों को दिलाई जाएगी।
आरबी वर्मा, अपर जिला उद्यान अधिकारी

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