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जी हां! आम पट्टी में धेला भर सुविधा नहीं

Unnao Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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सफीपुर(उन्नाव)। प्रदेश की सबसे बड़े क्षेत्रफल वाली आम पट्टी में शासन की ओर से कोई सुविधा नहीं है। न दवा छिड़कने वाली मशीनें, न दवा, न रोगों की सही पहचान कर बचाव बताने वाले विशेषज्ञ और न ही तैयार फसल के विपणन के लिए कोई मंडी है। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते कड़ी मेहनत के बावजूद यहां के किसान और व्यापारी घाटे में चले जाते हैं।
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1992 में सफीपुर क्षेत्र को आम पट्टी घोषित किया गया था। इसके साथ ही यहां के ईट-भट्ठे आदि आनन-फानन में बंद करा दिए गए। इन बीस सालों में क्षेत्र में आम के बागों का रकबा चार गुना बढ़ गया। आम की नई-नई प्रजातियां तैयार होने लगीं। यहां के दशहरी ने मलिहाबाद के आम को भी पछाड़ दिया, इसके बावजूद इस क्षेत्र के लिए न अफसरों ने कोई सुविधा दी और न ही जनप्रतिनिधियों ने ही खास प्रयास किए।
आम पर बौर के साथ ही प्रकृति का प्रकोप शुरू हो जाता है। सर्दियों में कोहरे के कारण बौर सूख कर झड़ने लगते हैं । बाद में फफूंदी के प्रकोप की आशंका बढ़ जाती है। अमिया क टने के साथ ही कीटों का हमला होने लगता है। खंड विकास कार्यालय की कृषि रक्षा इकाई में वर्षों पुरानी कुछ मशीनें और मामूली दवाएं ही मिलती हैं।
लगातार मांग के बावजूद एक आम मंडी तक नहीं बन पाई है। रेलवे स्टेशन के समीप एक बाग में मंडी लगाई जाती है। सड़कें खराब होने से ट्रक बमुश्किल पहुंच पाते हैं। पहले दशहरी, फिर चौसा व सफेदा, खासुलखास और कलमी के अलावा स्वादिष्ट व कभी आम देने वाला यह क्षेत्र समस्याओं से अपने आप लड़ते हुए आम उत्पादन कर रहा है।

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