खेल अकादमी में नि:शक्त बनेंगे सशक्त

Unnao Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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उन्नाव। नि:शक्तों को सशक्त बनाने के लिए बेथर गांव में शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग खेल अकादमी फोस्टेरिक लिम्स रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा। इस अकादमी में विकलांग बच्चों को इंडोर गेम्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए कोई फीस नहीं ली जाएगी। इस अकादमी की शुरुआत के लिए 30 सितंबर को इसी गांव में महिला माउंटेनियर सम्मेलन का आयोजन होगा इसमें सात देशों के माउन्टेनियर भाग लेंगे। इसी सम्मेलन में सेंटर बनाने की रूपरेखा तय होगी। यह जानकारी माउन्टेनर अरुणिमा सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि इस अकादमी में हर राज्य के उन नि:शक्त दस-दस बच्चों को रखा जाएगा जो आर्थिक रूप से कमजोर होंगे। इसके साथ ही 25 प्रतिशत नार्मल बच्चे भी रखे जाएंगे। इसके लिए बेथर गांव में दस बीघे जमीन ली जाएगी। इसमें साढ़े तीन बीघे जमीन समाजसेवी उमाशंकर दीक्षित ने स्वामी बिक्र फील्ड के पीेछे दे दी है। साथ ही अकादमी को बनने में जो ईंट लगेगी उसको भी मुफ्त देने की बात कही है। अरुणिमा ने बताया कि 11 अप्रैल 2011 को ट्रेन से फेंक दिए जाने के कारण उनके दोनों पैर खराब हो गए थे। तब उन्होंने अस्पताल में मदद करने वालों का जज्बा देखा था। वहां खून देने वालों की कमी नहीं थी। साथ ही सरकार भी भरण पोषण के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दे रही थी। लेकिन प्रलोभनों को दर किनार कर अरुणिमा ने अकादमी खोलने का निर्णय लिया और मुफ्त में शिक्षा देने का मन बनाया। अब वह सपना धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है। अरुणिमा ने बताया कि 5 मई को वह अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची पिक किली मंजारों पर चढ़ने के लिए जा रही हैं। इसकी ऊंचाई 20,672 फिट है।
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30 सितंबर को होगी इसकी शुरुआत
उन्नाव। अकादमी की शुरुआत के लिए 30 सितंबर 2014 को बेथर गांव में महिला माउंटेनियर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, सऊदी अरब, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, आस्ट्रेलिया के अलावा इंडिया के भी माउंटेनर भी भाग लेंगे। इस सम्मेलन के बाद अकदमी की शुरुआत किस प्रकार होनी है इसकी रूपरेखा तय की जाएगी।
25 करोड़ रुपये की आएगी लागत
उन्नाव। इस अकादमी को बनवाने में 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसको बनवाने में टाटा, महिंद्रा, माइक्रोसाफ्ट के अलावा अन्य कंपनियां सहयोग करेंगी। इसके साथ ही अरुणिमा जिन संस्थानों में पढ़ाने जाती है वहां से मिलने वाली फीस से इसका निर्माण कराया जाएगा।

बेचारी शब्द ने बनाया माउंटेनर
उन्नाव। खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा को बेचारी शब्द ने माउंटेनर बना दिया। अरुणिमा बताती हैं कि ट्रेन से फेंके जाने के बाद लोग उन्हें बेचारी कहने लगे थे। यह शब्द उन्हें अच्छा नहीं लगा और वह माउंटेनर बन गईं। माउंटेनर की ट्रेनिंग उन्हें बिछेंद्री पाल ने दी। वहीं से उन्होंने प्रण लिया कि विकलांग बच्चों की हीन भावना को दूर करना है और उन्हें आगे बढ़ाना है।
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