परियर में 1976 में हुई थी खुदाई

Unnao Updated Fri, 25 Oct 2013 05:40 AM IST
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परियर (उन्नाव)। जिले के परियर स्थित गढ़ी में सबसे पहले 1976 में खुदाई हुई थी। प्राचीन आस्था और राजाओं का इलाका होने के कारण इस स्थान के पुरातात्विक महत्व को कांग्रेस के तत्कालीन सांसद ने समझा। पांच स्थानों पर हुई खुदाई में नीलम रत्न, बर्तन, मिट्टी के बड़े-बड़े खाली घड़े मिले थे। हालांकि इसके बाद इन वस्तुओं का क्या हुआ किसी को पता नहीं है। इस दौरान जमीन के अंदर जाने के लिए बड़े-बड़े ईंट से बनी सीढ़ियां भी मिली थीं। बाद में इस हिस्से को ऊपर से ढक दिया गया।
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परियर का गढी क्षेत्र इलाके के अन्य स्थानों से अलग टीले पर बसा है। बताया जाता है कि 12वीं सदी में परियर में राजा लोनिया पर ठाकुरों ने विजय पाई थी। उन्होंने इसे किले का रूप दिया। बाद में एक अन्य ठाकुर ने इस किले पर अधिकार कर लिया।
तत्कालीन सांसद जियाउल रहमान अंसारी के प्रयास पर पुरातत्व विभाग की टीम ने 1976 में चार महीने तक पांच जगह खुदाई की थी। एक स्थान पर जमीन में सीढ़ियां बनी मिलीं। यहां से बड़ा नीलम रत्न और मिट्टी के बर्तन मिले। बाद में अचानक खुदाई बंद हो गई और टीम के सदस्यों ने स्थानीय लोगों को रुपये देकर खुदाई के स्थान को बंद करा दिया।
परियर के कृष्ण कुमार दीक्षित गढ़ी में खुदाई की पुष्टि करते हैं। उनका कहना है कि तब खुदाई वाले स्थान पर गांव वालों को भी नहीं जाने दिया जाता था। खुदाई कर जाते समय टीम ने गांव के ही कुछ लोगों को रुपये दिए थे। कहा था कि उनके जाने के बाद खुदाई के स्थान को मिट्टी से ढक देना।

राम और लव-कुश के बीच हुआ था युद्ध
गंगा नदी के तट पर परियर बसा है। गढ़ी से कुछ किलोमीटर दूर महना (महारण) झील में लव-कुश ने भगवान राम की सेना से युद्ध किया था। इस युद्ध में राम की सेना पराजित हुई थी। यहां अष्टधातु के टुकड़े मिले हैं। बताया जाता है कि यह टुकड़े बाण के हैं। यहीं थोड़ी दूर पर जानकी कुंड है। कहा जाता है कि सीता जी यहीं पर पाताल में समा गई थीं। इस इलाके के गंगा पार दूसरी ओर बिठूर का इलाका है।
1857 की क्रांति के पहले बिठूर में नाना साहब पेशवा का शासन था। परियर में तब राजा राम कुमार भार्गव का शासन था। आजादी की पहली क्रांति के बाद नाना साहब पेशवा को जब बिठूर छोड़ना पड़ा तो वह गंगा नदी को पार कर परियर पहुंचे। यहां से वह राजा राम कुमार भार्गव के साथ सफीपुर होते हुए मोहान से लखनऊ को निकल गए। अंग्रेज सेना ने काफी दिनों तक पेशवा की तलाश की थी। बताया जाता है कि पेशवा काफी सोना और बहुमूल्य रत्न लेकर बिठूर से निकले थे।
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