श्रीराम का राजतिलक होते ही बरसे फूल

Unnao Updated Tue, 22 Oct 2013 05:41 AM IST
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उन्नाव। अयोध्या के राजा के रूप में भगवान राम का राजतिलक होते ही आसमान से फूलों की वर्षा होने लगी। राम का राजतिलक होते ही अयोध्या में उत्सव का माहौल बन गया। लोगों ने डांडिया रास रचाया और फूूलों की होली खेली। इसके साथ ही साकेत धाम में एक सप्ताह से चल रही रामलीला का समापन हो गया।
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साकेत धाम में चल रही रामलीला का सोमवार को भगवान राम के राजतिलक होने के साथ समापनह हो गया। इससे पूर्व परंपरागत ढंग से भगवान राम और सीता की आरती उतारी गई। लीला कार्यक्रम में अयोध्यावासियोें ने डांडिया नृत्य, फूलों की होली और राम के राजतिलक की लीला का मंचन किया। इसके बाद प्रतापगढ़ के पास के गांव अनंतारा से आए पं. शीतला प्रसाद मिश्रा व उनके पुत्र अयोध्या शरण मिश्रा ने प्रभावशाली कथक नृत्य सेे दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम देररात दो बजे तक चला।
फतेहपुरचौरासी प्रतिनिधि के अनुसार रावण वध एवं भगवान राम के राज तिलक के साथ ही कस्बे में चल रही समाजसेवी बाजपेई परिवार द्वारा आयोजित रामलीला का समापन हो गया।
नगर पंचायत फतेहपुर चौरासी में समाजसेवी बाजपेई परिवार द्वारा आयोजित रामलीला में रावण वध एवं गुरुधरी के मैदान में विशाल मेला संपन्न हुआ। शनिवार को भरत मिलाप के साथ राम का राजतिलक हर्षोल्लास से किया गया। इसके साथ रघुवंश रामलीला समिति की रामलीला का समापन हुआ। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

परम स्वतंत्र न सिर पर कोई
रामलीला में नारद मोह प्रसंग का मंचन
गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। नगर स्थित रामलीला मैदान मेें समिति द्वारा गणेश पूजन के साथ राम की लीलाओं का मंचन शुरू हो गया। जिसमें प्रथम दिन नारद मोह का प्रसंग दिखाया गया।
रविवार रात रामलीला में कलाकारों ने दिखाया नारद मुनि जंगल से गुजर रहे थे। तभी उन्हें प्रभु भक्ति जागृति हो गई और वह वहीं समाधि लगाकर तपस्या करने लगे। इस तपस्या से इंद्रदेव का सिहांसन हिलने लगा। तपस्या भंग करने के लिए इंद्रदेव ने अपने मित्र कामदेव के साथ रंभा, उर्वशी और मेनका आदि अप्सराओं को भेजा लेकिन मुनिश्रेष्ठ का तप नहीं टूटा। इससे नारद को इस बात का घमंड हो गया कि उन्होंने काम को जीत लिया। कुछ समय बाद राजा श्रीनिवास ने अपनी पुत्री विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचा। जिसमें नारद मुनि विश्वमोहिनी को देखकर मोहित हो गए और उसे अपनी पत्नी बनाने के लिए भगवान विष्णु से अपना सुंदर रूप मांगा। जिस पर उन्हें वानर का रूप दे दिया। विश्वमोहिनी ने वरमाला नारद के बजाए भगवान विष्णु को पहना दिया। यह देखकर नारद ने विष्णु भगवान को शाप दे दिया कि जिस तरह पत्नी के लिए मैं व्याकुल हूं उसी तरह आप भी पत्नी के वियोग में तड़पोगे। यह प्रसंग देख दर्शक भावविभोर हो गए।
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