शोभन सरकार पर मोदी की टिप्पणी हुई सियासी

Unnao Updated Tue, 22 Oct 2013 05:41 AM IST
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भगवंतनगर (उन्नाव)। राव राम बक्स सिंह के किले में स्वर्ण भंडार होने की भविष्यवाणी से सुर्खियों में आए संत शोभन सरकार से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के माफी मांगने के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। सपा, बसपा और कांग्रेस के सांसदों, विधायकों की टिप्पणियां वोट बैंक की सियासत का हिस्सा मानी जा रही हैं। शोभन सरकार के अनुयायियों की अच्छी-खासी तादाद है। मोदी की टिप्पणी से वे विचलित हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार को इसी संबंध में कानपुर के भाजपा विधायक सतीश महाना ने भी शोभन सरकार से मुलाकात की।
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नरेंद्र मोदी का माफी मांगना, खुद को मुसलमानों का हमदर्द साबित करने वाली सपा सरकार के विधायकों का संत की बातों का समर्थन करना कहीं-न-कहीं वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस सांसद अन्नू टंडन पहले ही कह चुकी हैं कि जो चिट्ठी शोभन सरकार ने जांच के लिए लिखी थी, वह उन्होंने ही केंद्र तक पहुंचाई थी। बसपा के राज्यसभा सदस्य ब्रजेश पाठक शोभन सरकार की टिप्पणी को संत की वाणी कह चुके हैं।
दरअसल, शोभन सरकार के अनुयायियों की संख्या बहुत ज्यादा है। संत के चमत्कारों और उनकी विकासवादी छवि के कारण बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक भी उनके अनुयायी हैं। वह अपने आश्रमों में लोगों से दूर रहते हैं, इसलिए उनके भक्तों की वास्तविक संख्या का ठीक-ठीक अनुमान लगाना कठिन है।
उनके अनुयायी कानपुर, कानपुर देहात, फतेहपुर, उन्नाव, रायबरेली, चित्रकूट, झांसी में सर्वाधिक हैं। अनुयायियों में नाराजगी इस बात की है कि जब संत के कहे अनुसार सरकार खुदाई नहीं करा रही है तो उन पर उंगली उठाने का भी किसी को हक नहीं है। अनुयायी कहते हैं कि जब शोभन सरकार की बताई जगह और गहराई पर स्वर्ण भंडार न निकले, तभी उनके संदर्भ में कोई सवाल उठा चाहिए। जब तक ऐसा नहीं है कोई संत को कुछ कहे तो अनुयायियों को आघात पहुंचता है।
बताया जा रहा है कि शोभन सरकार की बेदाग छवि और उनके अनुयायियों के रोष के कारण प्रधानमंत्री पद के भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को स्पष्टीकरण देना पड़ा है। जबकि वही मोदी ‘शिवालय से पहले शौचालय’ अपनी एक अन्य विवादित टिप्पणी पर चुप्पी साध गये थे। कहा जा रहा है कि शोभन सरकार पर टिप्पणी और उनके शिष्य स्वामी ओम के खुले मंच पर वार्ता के लिए चुनौती की चिट्ठी के बाद नरेंद्र मोदी को स्पष्टीकरण देना पड़ा है।
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