संत के ‘चमत्कार’ बने विश्वास का आधार

Unnao Updated Tue, 22 Oct 2013 05:41 AM IST
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उन्नाव। डाैंडियाखेड़ा में 1000 टन सोना दबा होने का दावा करने वाले आए संत शोभन सरकार देश ही नहीं विदेश में भी प्रसिद्ध हो गए हैं। संत के अनुयायी उन्हें भगवान का दर्जा देते हैं। शोभन सरकार के ‘चमत्कार’ ही उनके विश्वास का आधार बने हुए हैं। अनुयायियों के साथ ही क्षेत्र के लोगों का भी संत पर अटूट विश्वास है। उनका कहना है कि शोभन सरकार द्वारा किए गए जो भी चमत्कार हैं वह आम आदमी के बस की बात नहीं है। लोगों का यहां तक कहना है कि शोभन सरकार ने जो कह दिया वह अकाट्य सत्य है। संत के वचन पर शंका नहीं श्रद्धा होनी चाहिए।
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चमत्कार नंबर-1
तकिया क्षेत्र के गांव मनिकापुर निवासी अखिलेश बताते हैं कि कई साल पहले संत शोभन सरकार के बक्सर स्थित आश्रम में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था। भंडारा सुबह से रात तक चलता रहा लेकिन आने वाले भक्तों की भीड़ कम नहीं हुई। अचानक रसोई से सूचना आई कि तेल खत्म हो गया है और रात होने की वजह से तेल कहीं भी मिल नहीं पा रहा है। बाहर भक्तों की लाइन लगी हुई है। कुछ अनुयायियों ने यह बात शोभन सरकार से बताई तो उन्होंने कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं है, जाओ और मां गंगा से चार टीन तेल उधार ले आओ। कल सुबह उन्हें वापस कर देना। भक्त बक्सर गंगातट पर गए और चार टीनों में गंगाजल भर लाए। इसे कढ़ाई में डाल दिया। देखते ही देखते गंगाजल में पूड़ियां पकने लगीं और भंडारा संपन्न हुआ। इसके बाद दूसरे दिन चार टीन तेल मंगवाया गया और गंगा में डाल दिया गया।
चमत्कार नंबर-2
गांववालों के मुताबिक, बक्सर में गंगा पर बनाए जाने वाले पुल में प्रदेश सरकार द्वारा लगातार ढिलाई बरती जा रही थी जिसके चलते कई वर्षों तक पुल नहीं बन पाया। इस पर संत शोभन सरकार ने कहा कि अगर सरकार पुल नहीं बनवा पा रही है तो रहने दे वह खुद ही पुल बनवा देंगे। इसके बाद देखते ही देखते गंगातट पर सैकड़ों सीमेंट, मौरंग, और सरिया आदि के ट्रकों की लाइन लग गई। शासन तक बात पहुंची तो दूसरे ही दिन प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सीधे क्षेत्र में पहुंचे और शासन की ओर से पुल निर्माण की घोषणा की। इसके बाद बक्सर स्थित पुल का निर्माण हुआ।

चमत्कार नंबर-3
संत शोभन सरकार के एक पूर्व ड्राइवर ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह काफी पहले संतजी की गाड़ी चलाते थे। उनका कहना है कि उन्हें आदेश मिलता था कि सरकार को जाना है और गाड़ी गेट पर लगा दो। गाड़ी गेट पर लगाने के बाद सरकार पीछे आकर गाड़ी में बैठ जाते थे। इसके बाद जहां जाने के लिए कहा जाता था वह गाड़ी लेकर वहां के लिए चल देते थे। जैसे ही वह अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचते और गाड़ी का दरवाजा खोलने के लिए उतरते वैसे ही देखते कि संत तो पहले से ही द्वार गेट पर खड़े होते थे। उनका कहना था कि वह कब कहां आ जाएं और कहां चले जाएं कोई नहीं जान पाता है।

क्षत्रिय महासभा ने जताया हक
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रतिनिधिमंडल रविवार की शाम प्रदेश अध्यक्ष ठा. उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में नारेबाजी करता हुआ डौंडिया खेड़ा पहुंचा। उमाशंकर ने कहा कि किले से स्वर्ण भंडार निकले तो उस पर क्षत्रियों का हक है। यह पूछने पर कि जमीन के अंदर स्वर्ण भंडार निकले तो कैसा हक, उमाशंकर ने कहा कि यह कोई खनिज तत्व नहीं है। स्वर्ण भंडार को अंग्रेज लूट न सकें इसलिए यहां छुपाकर रखा गया है। राव राम बक्स सिंह क्षत्रिय थे इसलिए इस पर उनका हक है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमें पहले जानकारी नहीं थी कि यहां स्वर्ण भंडार है। अब जानकारी मिली है तो यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें उनका हक नहीं मिला तो वह कोर्ट भी जा सकते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय महामंत्री उमाकांत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता ठा. हरिवंश सिंह, महामंत्री उय प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।

250 से ज्यादा सिपाही, छह इंस्पेक्टर लगे
डौंडिया खेड़ा में किला परिसर की सुरक्षा के लिए एक एएसपी, दो सीओ, छह इंस्पेक्टर, 250 से ज्यादा पुलिस व पीएसी के जवान लगाए गए हैं। एक एसआई के नेतृत्व में पांच महिला सिपाहियों की भी तैनाती की गई है। रविवार को सीओ मनोज अवस्थी और तौकीर अहमद की ड्यूटी लगाई गई थी। एसपी सोनिया सिंह ने कहा कि दो दिन का रोटेशन तय किया गया है।

विदेशी भी पहुंच रहे
रविवार को भी डौंडिया खेड़ा में विदेशियों का आना जारी रहा। अमेरिका के सामाजिक कार्यकर्ता राबर्ट और इंग्लैंड के सामाजिक कार्यकर्ता रिचर्ड डौंडिया खेड़ा पहुंचे। वह लखनऊ में डॉ. आलोक श्रीवास्तव से मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि स्वर्ण भंडार होने की खबर जानने के बाद वह यहां किला देखने आए हैं। उन्होंने स्वर्ण भंडार मिलने के सवाल पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

बच्चे कर रहे मस्ती
डौंडिया खेड़ा में एक ओर स्वर्ण भंडार को लेकर लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है तो वहीं छोटे-छोटे बच्चे अपनी दुनिया में मस्त हैं। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण जब इलाके के लोग डौंडिया खेड़ा की चर्चा में मशगूल थे तो छोटे बच्चे क्रिकेट खेलने में व्यस्त थे।
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