कोशिशें बेकार, नहीं बढ़ी छात्राओं की संख्या

Unnao Published by: Updated Fri, 12 Jul 2013 05:31 AM IST
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कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों का हाल
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उन्नाव। हर तरह के प्रयासों के बाद भी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं की संख्या नहीं बढ़ रही है। सभी विद्यालयों में 100 छात्राओं के प्रवेश का आदेश है लेकिन सत्र प्रारंभ हुए 10 दिन अधिक हो चुके हैं अभी किसी कस्तूरबा विद्यालय में निर्धारित छात्राओं का प्रवेश नहीं हो पाया है।
जिले में साक्षरता दर को बढ़ाने के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। 13 विकासखंड ऐसे थे जहां साक्षरता दर कम थी। वहां साक्षरता दर बढ़ाने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खुलवाए गए थे। तीन विकासखंड सिकंदरपुर कर्ण, बीघापुर व सुमेरपुर में साक्षरता दर अधिक होने के कारण कस्तूरबा विद्यालयों का संचालन नहीं किया गया था। कस्तूरबा विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक छात्राओं को शिक्षा दी जाती है। इन विद्यालयों पढ़ने वाली छात्राओं को रहने के लिए आवास, खाना व पढ़ाई की उचित व्यवस्था है। साथ ही यदि कोई छात्रा बीमार पड़ जाती है तो उसका इलाज भी मुफ्त में कराया जाता है। टीचरों का कहना है कि इस विद्यालय में प्रवेश अगस्त माह तक लिए जाते हैं। लेकिन नियम के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह की ही छात्राओं की संख्या मान्य होती है। चूंकि यहां गरीब परिवार की छात्राएं आती हैं। उनके परिजन घरों में उनसे सभी तरह के काम कराते हैं। इसलिए भी कई लोग अपनी बेटियों को नहीं भेजते हैं। कुछ बेटियों को बीच पढ़ाई वापस भी लेकर चले जाते हैं।

ब्वायलर चलने से हो रही परेशानी
उन्नाव। सफीपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के बगल में एक पिपरमेंट निकालने का ब्वायलर है। इसके चलने से झार निकलती है। इससे छात्राओं व स्टाफ को दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। कई बार ब्वायलर संचालक से बात की गई लेकिन कोई फायदा नहीं निकला। बीएसए को इसकी जानकारी दे दी गई है। बीएसए ने कहा कि जल्द ही कार्रवाई कराई जाएगी।
विकासखंड निर्धारित संख्या प्रवेश
सिकंदरपुर सरोसी 100 50
असोहा 100 72
पुरवा 100 40
बिछिया 100 51
फतेहपुर चौरासी 100 50
औरास 100 40
नवाबगंज 100 60
सफीपुर 100 53
मियागंज 100 97
बांगरमऊ 100 95
हसनगंज 100 65
गंजमुरादाबाद 100 50
हिलौली 100 82
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में अभी प्रवेश चल रहे हैं। हो सकता है कि दो तीन कस्तूरबा विद्यालय में मानक के अनुसार छात्राओं की संख्या पूरी न हो। अन्य स्कूलों में अगस्त तक छात्राओं की संख्या मानक के अनुसार पहुंच जाएगी। - डॉ. मुकेश कुमार सिंह, बीएसए

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