बिजली विभाग को चार करोड़ की चपत!

Unnao Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
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उन्नाव। जिले की डेढ़ दर्जन फैक्ट्रियों में ताला पड़ने से विद्युत विभाग को तगड़ा झटका लगा है। फैक्ट्रियों के बंद रहने से बिजली का उपभोग नहीं हुआ है। एक भी यूनिट बिजली का खर्च न होने से विभाग को अब इन फैक्ट्रियों से करोड़ों रुपए की बिल राशि से हाथ धोना पड़ा है। इसी कारण विभाग को इस माह राजस्व लक्ष्य की शत प्रतिशत वसूली में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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14 जनवरी से इलाहाबाद में शुरू हुए महाकुंभ के दौरान स्नानार्थियों को शुद्ध जल मिले इसके लिए राज्य सरकार ने प्रदूषण फैला रही फैक्ट्रियों पर खास नजर रखने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे। मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रभारी जिलाधिकारी ने कुंभ के तीन दिन पहले ही संबंधित अधिकारियों से प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को बंद कराने को कहा था। इस पर विभागीय अफसरों ने जिले की डेढ़ दर्जन फैक्ट्रियों को सील कराकर बिजली कनेक्शन कटवा दिए थे । तभी से इन फैक्ट्रियों में पूरी तरह से काम बंद है। इसके चलते बिजली का मीटर भी नहीं घूमा।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस माह जिले को लगभग 20 करोड़ रुपए के राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया है। विभाग को 7 फरवरी तक इस लक्ष्य की शत-प्रतिशत वसूली करनी है। अभी तक मात्र 4-5 करोड़ की ही वसूली हो पाई है। जानकारों की मानें तो हर माह विभाग को इन फैक्ट्रियों से तगड़ा राजस्व मिलता है। इस बार बंदी ने विद्युत विभाग को राजस्व की बड़ी चोट दी है। एक अनुमान के मुताबिक, फैक्ट्रियों में तालाबंदी से विद्युत विभाग को करीब 4 करोड़ की चपत लगी है।
अधिशाषी अभियंता रामबुझारत ने भी माना कि हर माह करोड़ों का राजस्व देने वाली फैक्ट्रियों के बंद होने से लक्ष्य की शत-प्रतिशत वसूली में दिक्कतें आ रही हैं। फिर भी प्रयास है कि लक्ष्य के आसपास पहुंचा जा सके।


पिछले माह लक्ष्य से ज्यादा हुई थी वसूली
उन्नाव। दिसंबर में विद्युत वितरण खंड प्रथम को 9 करोड़ का लक्ष्य मिला था। विभागीय अफसरों ने 10 करोड़ की वसूली की थी। पिछले माह फैक्ट्रियां चालू थीं और लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा इन फैक्ट्रियों से बिजली बिल के रुप में वसूला गया था।


पीक आवर में रेट ज्यादा होने से बढ़ी दिक्कतें
उन्नाव। पीक ऑवर (शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक) में रेट ज्यादा होने से कई चालू फैक्ट्रियां इस समयावधि में उत्पादन बंद रखती हैं। इसके चलते बिजली की खपत घटती है और राजस्व भी कम मिलता है। सूत्रों की मानें तो सामान्य घंटों की अपेक्षा पीक ऑवर में बिजली की दरें ज्यादा हैं। इसलिए कई संचालक इस दौरान अपनी फैक्ट्रियां बंद रखते हैं जिसका असर भी विद्युत बिलों में दिख रहा है।

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