संत को होती है राष्ट्र व समाज की चिंता

Unnao Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
उन्नाव। ओसिया के जनक दुलारे विद्या मंदिर इंटर कालेज में चल रही रामकथा के दूसरे दिन कथा व्यास ने भक्तों को जीवन जीने के गुर बताए। इस दौरान भगवान राम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथा व्यास ने वर्तमान समय को लेकर चिंता व्यक्त की।
मानस मर्मज्ञ पं. शंभूनाथ व्यास ने कहा कि संत को चिंता अपने तन या धन की नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज की होती है। राजगद्दी पर विराजमान नायक यह नहीं समझ पाते कि वह सत्ता के मद में पाप करके अपने लिए नरक के द्वार खोल रहे हैं। संत का स्वभाव तो पीड़ा सहकर भी समाज का कष्ट दूर करना होता है। संतों का तिरस्कार करके या उन्हें पीड़ा पहुंचाकर मार्ग से विरत नहीं किया जा सकता। सच्चा संत कभी सत्य के मार्ग से अलग नहीं होता है। इस दौरान उन्होंने श्रीराम व श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत की मोहक वर्णन किया। कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब रावण के नेतृत्व में आततायी शक्तियां अपना विस्तार कर रही थीं, दक्षिण भारत में उसकी सेना दंडकारण्य में जम चुकी थी। तब विश्वामित्र और वशिष्ठ जैसे संतों ने इस संकट को पहचाना और श्रीराम जैसे नायक का चयन करके पहले ताड़का के नेतृत्व वाली राक्षसी सेना का अंत कराया। फिर लंका में रावण और उसके समस्त आतताइयोें का वध किया। इससे पूर्व रामकथा का प्रारंभ संस्थापक नरेन्द्र भदौरिया व प्रधानाचार्य सुशील शुक्ला ने कथा व्यास का सम्मान व दीप प्रज्जवलन कर किया। यहां पर वेणु रंजन, रमन, रवीन्द्र, अर्चना, प्रदीप, जयप्रकाश मिश्रा, गौरीशंकर बाजपेई, दिनेश पांडेय आदि मौजूद रहे।

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