उन्नाव में बुंदेलखंड से ज्यादा गरीबी

Unnao Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
उन्नाव। करीब डेढ़ सौ मिलोमीटर गंगाकटरी की उपजाऊ भूमि, विशाल मैंगो बेल्ट और तीन सैकड़ा औद्योगिक इकाइयों वाले उन्नाव में बुंदेलखंड से भी ज्यादा गरीबी है। कुल एपीएल परिवारों के सापेक्ष उन्नाव में बीपीएल परिवारों की संख्या 36 फीसदी से अधिक है जबकि बदहाली से जूझ रहे बुंदेलखंड के छह जिले के लोग बेहतर स्थिति में हैं। एपीएल परिवारों में बनाए गए महामाया योजना के एक लाख से अधिक लाभार्थियों को मिला दिया जाए तो उन्नाव में गरीब परिवारों की संख्या करीब आधी पहुंच जाती है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ, औद्योगिक क्षेत्र कानपुर और वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र रायबरेली के बीच आबाद उन्नाव में बुंदेलखंड से ज्यादा गरीबी है। ऐसा तब है जब पिछले 15 वर्षों में यहां छोटे-बड़े 300 उद्योग स्थापित हुए और करीब 150 किलोमीटर लंबा गंगा कटरी का उपजाऊ क्षेत्र है। इसके अलावा पांच ब्लाकों के करीब 32 हजार हेक्टयर क्षेत्रफल में मैंगो बेल्ट है। कृषि, बागवानी और औद्योगिक क्षेत्र से संपन्न होने के बावजूद उन्नाव जिले की करीब आधी आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है। उन्नाव की बदहाली की यह तस्वीर जिला पूर्ति विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं।
पूर्ति विभाग ने वर्ष 2006-07 में बीपीएल, अंत्योदय और एपीएल के नए राशनकार्ड बनाए थे। विभाग के आनलाइन डाटा के अनुसार राशनकार्ड जारी करने में 184660 परिवारों को बीपीएल और 114449 परिवारों को अंत्योदय की श्रेणी में रखा गया था। इसी तरह 524668 परिवारों को एपीएल श्रेणी के राशनकार्ड जारी किए गए थे। वर्ष 2009-10 में प्रदेश प्रदेश सरकार ने महामाया पेंशन योजना शुरू की। इस योजना में एपीएल श्रेणी में शामिल गरीबों को पेंशन के साथ राशन की योजना थी। इसके तहत एपीएल परिवारों के 107112 लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों को 400 रुपए मासिक पेंशन के साथ ही बीपीएल परिवारों की तरह राशन (गेहूं, चावल ) भी दिया जा रहा है। इस तरह जिले में 4062221 परिवार गरीबी की श्रेणी में पहुंच गए हैं जबकि 417556 परिवार एपीएल हैं। यानी कुल जिले में राशनकार्डों (परिवारों) की संख्या 823777 है। यह संख्या जिले की आबादी के हिसाब से अनुमानित परिवारों की संख्या से भी अधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना को को ही लें तो जिले की आबादी करीब 3110595 है। एक परिवार में चार सदस्यों के अनुपात से कुल परिवारों की संख्या 777650 के आसपास ही पहुंचती है। इससे स्पष्ट है कि राशनकार्ड बनाने में कहीं न कहीं धांधली जरूर हुई है।
उन्नाव और बुंदेलखंड में गरीबी का प्रतिशत
उन्नाव। जिले में 524876 एपीएल और 299109 गरीब (बीपीएल, अंत्योदय) परिवार हैं। इस लिहाज से उन्नाव में गरीबों का प्रतिशत 36.3 है, जबकि बुंदेलखंड के बांदा में 34.35, महोबा में 16.90, चित्रकूट में 30.88, जालौन में 22.95 और झांसी में 21.09 प्रतिशत गरीब हैं। हमीरपुर जरूर उन्नाव से कुछ बेहतर स्थिति है। यहां गरीब परिवारों का प्रतिशत उन्नाव से मात्र 0.57 फीसदी ही ज्यादा, यानी ये 36.95 प्रतिशत है।

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