फसलों के दुश्मन नीलगायों से खुद निपट सकेंगे किसान

Unnao Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
उन्नाव। वनरोजों (नीलगाय) का आतंक झेल रहे जिले के किसान अब फसलों का नुकसान होने पर एसडीएम व रेंजर से अनुमति लेकर लाइसेंसी असलहे से इन्हें मार सकते हैं लेकिन नीलगायों को मारने से पहले उपजिलाधिकारी व रेंजर को शिकायतीपत्र देना होगा जिसमें होने वाले नुकसान की जानकारी देनी पड़ेगी। यदि गांव में किसी के पास लाइसेंसी असलहा नहीं है तो नीलगायों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी संबंधित रेंजर की होगी।
नीलगाय फसलों को तो तबाह कर ही रहे हैं, आम आदमी के जान के दुश्मन भी बनते जा रहे हैं। नीलगायों के प्रकोप से कई क्षेत्रों में किसानों ने दलहनी फसलों की बुआई बंद कर दी है। रबी की प्रमुख फसलें बचाने के लिए खेतों में रतजगा करने को मजबूर हैं। जिले का शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां नीलगायों की धमाचौकड़ी से किसान परेशान न हों। दलहनी फसलों के साथ ही गेहूं, धान, बाजरा समेत करीब सभी फसलों के दुश्मन बन चुके वनरोज कम ऊंचाई वाले आम, कटहल, जामुन समेत अन्य पौधों को भी जड़ से नष्ट कर रहे हैं। स्थिति यह है कि बांगरमऊ से लेकर बक्सर तक गंगा कटरी में हजारों की संख्या में वनरोज हैं। असोहा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने नीलगायों के प्रकोप से दलहनी फसलों की बुआई बंद कर दी है।
यह नीलगाय झुंड के रूप में आते हैं और किसानों की खड़ी फसल को नष्ट कर जाते हैं जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाता है। किसानों की मानें तो उन लोगों ने अरहर, मटर, चना, मक्का व बाजरा आदि की बुआई बंद कर दी है। जो फसलें बोते हैं उसके लिए परिवार के साथ फसल की रखवाली को खेतों में रतजगा करना पड़ता है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद इन्हें मारने की अनुमति किसानों को मिल गई है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

फुर्ती में हिरन, दौड़ में घोड़े से कम नहीं
उन्नाव। शरीर से गाय और फुर्ती में हिरन जैसे वनरोज दौड़ने में किसी भी मामले में घोड़ों से कम नहीं होते हैं। कुछ समय पूर्व तक यह मानव को देखकर ही फर्राटे भरते हुए गायब हो जाते थे लेकिन अब इनके स्वभाव में भी बड़ा परिवर्तन होने की बात किसान कहते हैं। बताते हैं कि अब यह मानव से डरने के बजाए उन पर आक्रामक हो जाते हैं। जिले में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें वनरोजों ने पटककर लोगों को मौत की नींद सुलाया है।

नीलगाय से टकराकर पहुंचे काल के गाल में
उन्नाव। नीलगाय केवल फसलों को ही नहीं नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि हादसों का कारण भी बन रहे हैं। डेढ़ साल पहले बांगरमऊ में उन्नाव-हरदोई रोड पर कोल्डस्टोरेज के सामने नीलगाय के झुंड से हैबतपुर निवासी शिशुपाल उर्फ कल्लू पुत्र इन्द्रजीत टकरा गया था जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि बाइक पर सवार उसका भाई अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिसकर्मी कृष्णपाल सिंह व केपी सिंह भी नीलगांयोें के झुंड से टकराकर घायल हो गए थे। मौरावां में साढ़े तीन वर्ष पूर्व एक अप्रवासी भारतीय की मोटरसाइकिल सड़क से गुजरते वनरोजों के झुंड से टकरा गई थी जिससे वह भी असमय काल के गाल में समा गया था। सोहरामऊ में एक युवक को नीलगाय ने पटककर मार डाला था। चकलवंशी में अर्जुन पुत्र श्रीपाल निवासी उनवा सफीपुर भी वनरोजों की चपेट में आकर घायल हुआ था। छह माह पूर्व असोहा निवासी मनोज गुप्ता व सुदौली के सुरेन्द्र मिश्र की बाइक नीलगाय से टकरा गई थी जिससे दोनों के पैर टूट गए थे। रायबरेली में कार्यरत विद्युत अधिकारियों की गाड़ी भी वनरोज की चपेट में आकर पलट गई थी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
यह गाय की प्रजाति का जानवर नहीं है। एसडीएम व रेंजर से इसे मारने की अनुमति मिलेगी। किसान इसे अनुमति लेकर लाइसेंसी असलहे से मार सकते हैं। इसके लिए पहले उन्हें अपनी समस्या बतानी होगी। बताना होगा कि किस तरह से नीलगाय उनके लिए नुकसान का सबब बन रहे हैं।
शीतल वर्मा, जिलाधिकारी उन्नाव।

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