0.25 फीसदी लोगों को भी आधार कार्ड नहीं!

Unnao Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। डेढ़ वर्ष पहले जोर शोर से शुरू हुई आधार कार्ड स्कीम फिलहाल फरवरी से बंद पड़ी है। यहां एक प्रतिशत से भी कम आधार कार्ड बनाए गए उनमें से भी अधिकतर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के हैं। ऐसे में दिसंबर 2013 तक 31 लाख आधार कार्ड बनाना असंभव सा है। आधार कार्ड तैयार न होने से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी कैश सब्सिडी ट्रांसफर स्कीम समय से लागू हो सकेगी इसमें संदेह है।
यूनिक आइडेंटिफिकेशन यानी कि आधार कार्ड बनाने का काम जिले में बकरांदी प्राइवेट लिमिटेड कपंनी को दिया गया था। कंपनी ने जून 2011 में कार्ड बनाने शुरू किए। शहर और शुक्लागंज कस्बे के कई मोहल्लों कंपनी ने कैंप लगाकर फोटो, फिंगर और आइरिस प्रिंट तो लिए लेकिन उनमें से 99 प्रतिशत लोगोें को कार्ड अभी तक नहीं मिले। स्कीम का ज्यादा फायदा जिले में सरकारी कर्मचारियों को ही मिला। कारण कंपनी ने पुलिस लाइन और डाकघर में कैंप लगाकर ही कार्ड बनाए। कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी भी मानते हैं कि अभी तक जिले की जनसंख्या के .25 प्रतिशत लोगों को भी आधार कार्ड जारी नहीं हो सके हैं।
कपंनी के मुख्य प्रबंधक एसके मिश्रा ने बताया कि कंपनी छह माह तक ही कार्य कर पाई। फरवरी 2012 में केंद्र सरकार ने आधार कार्ड बनाने की योजना बंद कर दी। सूत्रों के मुताबिक इन छह माह में लगाए गए कैंपों में जो भी डेटा बेस तैयार हुआ यानि कि जिन लोगों की फोटो खींची गई, फिंगर प्रिंट और आइरिस प्रिंट लिया गया उनके आधार कार्ड बनने से पहले ही योजना को बंद कर दिया गया। श्री मिश्रा ने बताया कि फिलहाल केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में आधार कार्ड योजना फिर से शुरू की है लेकिन अभी तक प्रदेश में इसकी घोषणा नहीं की गई है। काम दोबारा शुरू होने पर ही अब लोगों को कार्ड मिल सकेंगे। मालूम हो कि कंपनी छह माह में कुछ हजार कार्ड ही जारी कर सकी है। केंद्र सरकार दिसंबर 2013 के अंत तक आधार कार्ड के जरिए कैश सब्सिडी ट्रांसफर स्कीम शुरू करना चाहती है। जिस गति से जून 2011 और फरवरी 2012 के बीच आधार कार्ड बने उस गति से दिसंबर 2013 तक जिले के 31 लाख से अधिक नागरिकों को कार्ड जारी करना मुमकिन नहीं लग रहा है। जिन मोहल्लों में आधार कार्ड बनाने के लिए कैंप लगाए गए उनमें उनमें से इक्का-दुक्का लोगों को ही कार्ड बनकर मिले हैं। बाकी लोग अभी इंतजार ही कर रहे हैं।
कैश सब्सिडी ट्रंासफर स्कीम के संबंध में लोगों की राय अलग अलग मिली। शहर के मौहारीबाग मोहल्ला निवासिनी छात्रा प्रियंका सिंह का मानना है कि सिलेंडर खरीदते समय तो पूरा पैसा देना ही पड़ेगा सब्सिडी की धनराशि बैंक खाते में बाद में कब आएगी यह कौन जानता है। शहर के कब्बाखेड़ा मोहल्ला निवासी दिलीप चौहान का मानना है कि इस प्रक्रिया से कालाबाजारी और सब्सिडी का दुरुपयोग पूरी तरह बंद हो जाएगा लाभार्थी को सब्सिडी उसके खाते में मिलेगी।



तो इसलिए बने कम कार्ड
उन्नाव। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार कार्ड स्कीम का काम नवंबर 2010 में ही शुरू किया गया था। राज्यसभा सदस्य ब्रजेश पाठक ने अपनी फोटो खिंचा कर आधार कार्ड बनवाने का शुभारंभ किया था। केंद्र की कांग्रेस सरकार की स्कीम को बसपा सांसद द्वारा शुभारंभ किया जाना ही इसके दुर्भाग्य की शुरुआत सिद्ध हुई। कुछ ही दिनाें में कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया गया इस दौरान कंपनी काफी काम कर चुकी थी। बकरंादी प्राइवेट लिमिटेड को दोबारा इसका काम सौंपा गया जिसने जून 2012 में आधार कार्ड बनाने शुरू किए। कंपनी केवल छह माह ही काम कर पाई थी कि केंद्र सरकार ने स्कीम ही बंद कर दी।

वर्जन
फिलहाल आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। जब शासन से आदेश आएगा तो संबंधित संस्था से तेजी से काम करते हुए जल्द से जल्द पूरे जिले के नागरिकों को आधार कार्ड दिए जाने के लिए कहेंगे। -शिवेंद्र कुमार सिंह, एडीएम

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