कुपोषित बच्चों के लिए बनेगा स्पेशल वार्ड

Unnao Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। कुपोषित बच्चों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जनपद स्तर पर पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना होनी है। यहां कुपोषण से ग्रस्त बच्चों का इलाज किया जाएगा। बच्चों को उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। इसके लिए नया स्टाफ भी रखा जाएगा।
दिन प्रति दिन कुपोषण ग्रस्त बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके चलते बच्चाें का वजन और ऊंचाई भी कम होती जा रही है। कुपोषित बच्चों में मृत्यु की संभावना भी नौ गुना अधिक रहती है। कुपोषण सबसे अधिक तीन वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों में होता है। कुपोषण के उपचार एवं रोकथाम के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पुनर्वास केंद्र खोले जा रहे हैं। यह केंद्र जनपद के जिला पुरुष चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व मेडिकल कालेजों में क्रियाशील होंगे। जिला पुरुष चिकित्सालय में पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की भर्ती के लिए अलग वार्ड, किचन, शौचालय एवं बरामदा भी होना अनिवार्य है। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए स्टाफ की आवश्यकता होती है। इसके लिए भर्ती संविदा पर की जाएगी। केंद्र को चलाने के लिए चिकित्साधिकारी, न्यूट्रीशन काउंसलर, स्टाफ नर्स, रसोईया व केयर टेकर की नियुक्ति की जाएगी।

पोषण पुनर्वास केंद्र का स्वरूप
-बच्चों के मनोरंजन एवं मनो सामाजिक विकास के लिए दीवारों पर पेंटिंग तथा पोस्टर लगाए जाएंगे। इसमें यूनीसेफ से तकनीकी सलाह ली जाएगी।
-बच्चे का आहार भी चिकित्सालय में बनेगा। इसके लिए अलग से एक कमरा भी होगा। जिसमें खाना बनाने के उपकरण व बर्तन तौल व माप की भी व्यवस्था होगी। रसोईघर में फ्रिज की भी व्यवस्था होगी।
-बच्चे की माता के रहने के लिए कक्ष में बेड, गद्दा, चादर, मच्छरदानी तथा आवश्यकतानुसार पंखों की व्यवस्था की जाएगी। शौचालय व स्नानघर की भी व्यवस्था होगी।

पुनर्वास केंद्र खोलने के उद्देश्य
-पांच वर्ष के अति कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल जिससे कुपोषण से शिशु एवं बाल मृत्युदर में वांछित कमी लाई जाई सके।
- अति कुपोषित बच्चों की शारीरिक एवं मनोसामाजिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
-बच्चे की खानपान व उचित देखभाल में माताओं के व्यवहार में परिवर्तन लाने की क्षमता को विकसित करना।
- समुदाय को पोषण संबंधी समस्याओं व समाधान के प्रति जागरूक करना।

यह सेवाएं दी जाएंगी
-भर्ती कुपोषित बच्चों की चौबीस घंटे उचित देखभाल।
-आवश्यक जांच बीमारी एवं जटिलताओं का मानक प्रोटोकाल के अनुरूप इलाज।
-उपचारात्मक आहार की व्यवस्था।
- मां एवं देखभाल करने वाले को उचित खानपान एवं सफाई के विषय पर परामर्श देना।
- माताओं को स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थों से कम लागत की पोषण विधियों पर प्रशिक्षित करना।
-पोषण पुनर्वास केंद्र में हर 15 दिन में दो माह तक चार बार फालोअप करना।


चिकित्साधिकारी के कार्य एवं दायित्व
उन्नाव। चिकित्साधिकारी की ओर से कुपोषित बच्चों का उपचार करना। दवा के विषय में स्टाफ नर्स, न्यूट्रीशनिस्ट को आहार की मात्रा तय करने तथा सभी कर्मियों का आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन। साथ ही माह के अंत में मासिक रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी व महानिदेशक परिवार कल्याण एवं एसपीएमयू को प्रेषित करना।

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