स्वयं सहायता समूहों को नहीं मिल रहे ग्रामीण बाजार

Unnao Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। जिले के करीब ग्यारह हजार स्वयं सहायता समूहों को अपने हुनर को बेचने के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। कारण, जिलेे मेें आज तक एक भी ग्रामीण बाजार (विलेज हाट) बन कर तैयार नहीं हुआ है। इसके अलावा इन बाजारों में तैयार माल को रखने के लिए पांच वर्क शेड भी नहीं बने हैं। स्वीकृत होने के तीन साल बाद भी न तो वर्क शेड और न ही ग्रामीण बाजारों का निर्माण हो सका है। अधिकारी जल्द ही इन बाजारों को बनवाने का दावा कर रहे हैं।
जिले के स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए सामान को बाजार उपलब्ध कराने के उद्ेदश्य से वर्ष 2010-11 में प्रत्येक ब्लाक में एक ग्रामीण बाजार बनाने की योजना प्रस्तुत की गई थी। इसके तहत प्रत्येक विकास खंड में करीब दस लाख रुपए की लागत से एक ग्रामीण बाजार का निर्माण किया जाना था। इसके अलावा इन समूहों को तैयार माल रखने के लिए पंद्रह लाख की लागत से जिले में पांच वर्कशेड बनाने का प्रपोजल तैयार किया गया था। दोनाें प्रपोजल वित्तीय वर्ष 2010-11 में ही स्वीकृत हो गए थे। मार्च 2011 में ही इन बाजारों और वर्क शेड निर्माण के लिए 75 प्रतिशत धनराशि भी जारी कर दी गई थी। वित्तीय वर्ष 2011-12 में निर्माण कार्य शुरू न होने के विभाग उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दे सका। इसके चलते बाकी की 25 प्रतिशत धनराशि लैप्स हो गई। वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी छह माह बीत चुके हैं लेकिन कहीं भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में इस वर्ष भी दूसरी किस्त की धनराशि लैप्स होने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है। विभागीय लापरवाही का खामियाजा जिले के स्वयं सहायता समूहों को भुगतना पड़ रहा है। जिला ग्राम्य विकास अधिकारी कार्यालय के मुताबिक जिले में करीब ग्यारह हजार स्वयं सहायता समूह पंजीकृत हैं। जिले में ग्रामीण बाजार न बनने के कारण इन समूहों को अपनी कारीगरी बेचने के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है। दूसरे जिले में माल लाने ले जाने में मुनाफा काफी कम हो जाता है। मुख्य विकास अधिकारी हेमंत कुमार ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। अधिकारियों से ग्रामीण बाजारों की स्थिति की रिपोर्ट मांगेंगे यदि बाजार निर्मित नहीं हुए हैं तो प्राथमिकता के आधार पर उन्हें तैयार कराया जाएगा।

‘सरस हाट’ के हाल भी बेहाल
उन्नाव। जिले के सरस हाट का भी हाल खराब ही है। वित्तीय वर्ष 2008-09 में 9 और 2009-10 में 7 सरस हाट निर्मित किए जाने की स्वीकृति मिली थी। इन सबके लिए शासन ने 2 करोड़ 57 लाख 75 हजार रुपया भी जारी कर दिया था। चार वर्ष से अधिक बीतने के बाद भी चार सरस हाट का निर्माण अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। इस दौरान निर्माण लागत बढ़ने के कारण शासन ने 54 लाख रुपया और जारी किया। किसी तरह एक दर्जन सरस हाट बनकर तैयार हुए। सीडीओ हेमंत कुमार ने बताया कि वह इसकी जानकारी कर जल्द ही सभी सरस हाट चालू करवाएंगे।

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