छात्रवृत्ति घोटाले में एक और खुलासा, पूर्व समाज कल्याण अधिकारी समेत चार पर रिपोर्ट

Unnao Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले की तफ्तीश में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के खाते से फर्जी तरीके से 10 लाख रुपए निकाले जाने का खुलासा होने पर परियोजना निदेशक (पीडी) ने पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी, यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। हालांकि गड़बड़ी का खुलासा होने और पकड़े जाने के डर से तीन महीने बाद धनराशि को डीआरडीए के खाते में रिवर्स करा दिया गया था। फर्जीवाड़े के आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
डीआरडीए के परियोजना निदेशक जावेद अख्तर जैदी ने कोतवाली में पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी राकेश रमन, यूनियन बैंक आफ इंडिया के मुख्य शाखा प्रबंधक अवधेश कुमार, बैंक के क्लर्क आरके गुप्ता और समाज कल्याण कार्यालय के लेखाकार रामस्वरूप के खिलाफ धोखाधड़ी और अभिलेखों में हेराफेरी का मुकदमा दर्ज कराया है। इसके अनुसार 21 जुलाई 2009 को जिला समाज कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर युक्त पत्र से डीआरडीए के खाता संख्या 51960100009 से चेक संख्या 51000201 के जरिए 10 लाख रुपए निकाल कर मां शारदा शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान अकबरपुर दबौली के नाम जारी कर दिए गए। समाज कल्याण विभाग के अधिकारी कई महीने तक मामले को दबाए रहे और जब पकड़े जाने की नौबत आई तो आनन-फानन इस रकम को तीन महीने बाद 22 अक्टूबर 2009 को डीआरडीए के खाते में रिवर्स कर दिया गया। बैंक से मिले अभिलेखों के मुताबिक यह रकम शिक्षण संस्थान द्वारा डीआरडीए के पक्ष में जारी की गई चेक संख्या 058929 से रिवर्स की गई। समाज कल्याण अधिकारियों और बैंक आधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से चेक बुक हासिल की और हस्ताक्षर का मिलान और जांच किए बिना ही धनराशि जारी कर दी।
इस बाबत एसपी जे रविंदर गौड़ ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि छात्रवृत्ति घोटाले में कई और अधिकारी शिकंजे में आएंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व समाज कल्याण अधिकारी यादवेंद्र सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट पहले ही जारी हो चुका है। दूसरी ओर पूर्व समाज कल्याण अधिकारी राकेश रमन ने कहा कि चेक पर फर्जी हस्ताक्षर हैं। डीआरडीए के खाते से उनके हस्ताक्षर से 10 लाख रुपया निकाले जाने की जानकारी होते ही उन्होंने डीएम को अवगत कराया था। इसके बाद अगस्त 2009 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्हीं की रिपोर्ट पर घोटाले का खुलासा हुआ था। उन्होंने कहा कि जब जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद नाम से कोई बैंक खाता ही नहीं है तो चेक बुक मांगने या प्राप्त करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। तत्कालीन डीएम अनीता सी मेश्राम ने भी शासन को भेजी गई रिपोर्ट में समाज कल्याण अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर होने की रिपोर्ट दी थी।

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