25 साल में फर्श से अर्श पर, अब अस्तित्व पर संकट

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Sat, 21 Dec 2019 12:18 AM IST
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उन्नाव। नाबालिग से दुष्कर्म में उम्रकैद में की सजा पाने वाले कुलदीप सेंगर ने पच्चीस साल में फर्श से अर्श तक का सफर तय किया और 20 महीने में अस्तित्व पर संकट आ गया। सेंगर का राजनीतिक सफर गांव-पंचायत की राजनीति से शुरू हुआ था। वह एक बार गांव का प्रधान भी चुना गया। इसके बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा और फिर मुड़कर नहीं देखा। सभी दलों में अच्छी पकड़ और सियासत में माहिर सेंगर लगातार चौथी बार विधायक चुना गया।
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कुलदीप सिंह के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के हाथगाम थाना के मुक्तीपुर गांव के रहने वाले थे। नाना वीरेंद्र सिंह के केवल दो बेटियां चुन्नी देवी (विधायक की मां, अब मृत) और सरोजनी देवी हैं। चुन्नी देवी शादी के बाद से अपने परिवार के साथ पिता के साथ रहने लगीं। चार भाईयों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज (अब मृतक) दूसरे नंबर का और अतुल तीसरे नंबर का है। सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। सभी का जन्म भी ननिहाल में गांव में हुआ। कुलदीप 1996 में पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए। इसके बाद दो पंचवर्षीय में मां और वर्तमान में छोटे भाई अतुल सेंगर की पत्नी अर्चना सिंह ग्राम प्रधान हैं। वर्ष 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहला चुनाव जीता। 2007 में उन्होने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने। 2012 में फिर सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए।
कुलदीप की राजनीतिक पकड़ा का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके पार्टी की घोषित प्रत्याशी के खिलाफ जिला पंचायत चुनाव में पत्नी संगीता सेंगर को उतार दिया। इस चुनाव में संगीता सेंगर ने सपा प्रत्याशी ज्योति रावत को हराकर जीत हासिल की। इस समय वे जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थामा। भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ से प्रत्याशी बनाया और वह लगातार चौथी बार विधायक बने। इससे पहले छोटे भाई मनोज सिंह (अब मृत) 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लाक के प्रमुख रहे। बीती 26 अक्तूबर 2019 को मनोज सिंह की दिल्ली में मौत हो गई।
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कुलदीप के हिस्से आई तनहाई, परिवार भी बेसहारा
उन्नाव। हमेशा भीड़ से घिरे रहने वाले कुलदीप सेंगर को अब सलाखों के पीछे की तनहाई झेलनी पड़ेगी। लगातार चार बार के विधायक, पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष, छोटे भाई की पत्नी ग्राम प्रधान होने के सात ही जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र सदर, भगवंतनगर और बांगरमऊ का प्रतिनिधित्व करने से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से मुलाकात करने वाले कुलदीप सेंगर बीस महीने से सलाखों के पीछे थे। शुक्रवार को सलाखों से छुटकारा मिलने उम्मीद भी टूट गई। अब बाकी उम्र उन्हें सलाखों के पीछे तनहाई में गुजारनी होगी।
इनसेट
परिवार ने शुरू की अपील की तैयारी
उन्नाव। कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा होते ही परिवार के लोगों ने उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी शुरू कर दी है। परिवार के खास व नजदीकी लोगों ने बताया कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ। आरोप है कि उनकी ओर से दिए गए अहम सबूतों और गवाहों को भी सीबीआई ने नजर अंदाज कर दिया। घरवालों ने शुक्रवार से ही उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी शुरू कर दी है।
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सजा के बाद अब विधायकी पर तलवार
उन्नाव। कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा होने के बाद अब उनकी विधायकी पर भी तलवार लटक गई है। भीतर खाने कई दलों के लोगों ने चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। दुष्कर्म का दोष साबित होने के बाद से ही कुलदीप सेंगर की विधानसभा से सदस्यता खत्म होने की चर्चाएं जोर हो गई थीं। इसी के चलते कई लोगों ने अंदर खाने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दीं। बांगरमऊ और आसपास क्षेत्र में लगे नए साल की बधाई संदेशों वाले होर्डिंगों में भी कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो बांगरमऊ से चुनाव लड़ने का मंसूबा संजोए हैं।
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प्रतिद्वंदियों को नहीं सुहा रहा था कुलदीप का बढ़ता कद
भाजपा ने 17 दावेदारों को किनारे कर दिया था टिकट
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। सपा छोड़कर भाजपा में आए कुलदीप का पार्टी में बढ़ता कद और सफलता पार्टी के लोग भी हजम नहीं कर पा रहे थे। विधानसभा चुनाव में बांगरमऊ क्षेत्र से टिकट के 17 दावेदारों को नजर अंदाज कर भाजपा हाईकमान ने कुलदीप को टिकट दिया था। उनकी जोरदार खिलाफत भाजपा से चुनाव जीतने के बाद ही शुरू हो गई थी। एक तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री ने शहर के एक कार्यक्रम में कुलदीप को अपना खास बताते हुए यहां तक कह दिया था कि चुनाव से पहले पार्टी (भाजपा) में कुलदीप नहीं आए उन्हें मैं खुद लेने गया था।
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विधायक की जेल बदलने की भी चर्चा
उन्नाव। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में हो रही सुनवाई में दुष्कर्म के मुकदमे में फैसला हो जाने के बाद अब चर्चा तेज है कि विधायक को जल्द ही तिहाड़ जेल से उत्तर प्रदेश की किसी जेल में शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि अधिवक्ता अभी चार और मुकदमे उसी तीस हजारी कोर्ट में विचाराधीन होने से फिलहाल कुलदीप के तिहाड़ जेल में ही रहने की बात कह रहे हैं।
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यह मुकदमे हैं विचाराधीन
- दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या का मुकदमा।
- पिटाई के बाद उसे ही आर्म्स एक्ट में जेल भेजने।
- 2017 में पीड़िता को अगवा करने व गैंगरेप करने।
- रायबरेली में हुए रहस्यम सड़क हादसे का मुकदमा
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