उपनयन के बाद बटुक वेद अध्ययन के योग्य बनता है : शरणानंद

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Tue, 27 Nov 2018 12:16 AM IST
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बीघापुर/पाटन। ब्राह्मण होने के गौरव से काम नहीं चलेगा। आचरण से श्रेष्ठ बनकर जगत का कल्याण करने वाले ब्राह्मण होते हैं। इस प्रकार उपनयन संस्कार के बाद बटुक वेद अध्ययन के योग्य बनता। यह बातें अष्टम विश्व वैदिक सम्मेलन में गुरु शरणानंदजी महाराज ने कही।
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बिहार के एमजी कालेज छाछीराईखेड़ा में आयोजित आठवें विश्व वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ रमण रेती गोकुल के गुरु शरणानंदजी महाराज ने दीप जलाकर किया। बैसवारा ब्राह्मण उत्थान समिति के अध्यक्ष अशोक पांडेय ने गुरु शरणानंदजी महाराज का माल्यार्पण व प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया।
इसके बाद महाराज ने बटुकों को संबोधित करते हुए कहा भूत की चर्चा कर गौरवान्वित होना ठीक नहीं बल्कि क्षेत्र और लोक कल्याण की चर्चा कर कर्तव्य का निर्धारण करें। ब्राह्मण का शरीर अपने शरीर की तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं है। बल्कि वह अपने आचरण व त्याग से ही पूज्य है।
इस दौरान जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष हरि सहाय मिश्र मदन, नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद नारायण शुक्ला ,जिला पंचायत सदस्य रिंकू शुक्ला, भाजपा नेता अरुण दीक्षित, शैलेंद्र शुक्ला, आनंद मोहन द्विवेदी, जय शंकर पांडेय, डा. चंद्र कुमार अवस्थी, प्रकाश मिश्रा, सुंदर लाल बाजपेई ,जागेश्वर अवस्थी, सतीश त्रिपाठी, परमू बाजपेई, प्रमोद द्विवेदी, एसपी दीक्षित, बीडी त्रिवेदी , विमलेश बाजपेई भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन बाल गोविंद द्विवेदी ने किया। विश्व वैदिक सम्मेलन में आचार्य शरणानंदजी महाराज की मौजूदगी में 93 नव बटुकों के यज्ञोपवीत संस्कार हुए। यज्ञोपवीत संस्कार अयोध्या के आचार्य श्रीधर द्विवेदी, जय प्रकाश, श्रीधर, रामेश्वर प्रसाद मिश्र ने कराया। बैसवारा ब्राह्मण उत्थान समिति की ओर से बटुकों को वस्त्र, वैदिक पुस्तकें व परशुराम का चित्र दिया गया।

लवकुश की जन्मभूमि व युद्धभूमि है जिला
गुरु शरणानंदजी महाराज ने कहा बैसवारे की भूमि विश्व को नेतृत्व प्रदान करने वाली है। कहा गर्गाचार्य का आश्रम, लवकुश की जन्म भूमि, लवकुश के शिक्षा प्राप्त करने की भूमि के साथ ही युद्धभूमि भी है। यह क्षेत्र अनंत काल से ही हर क्षेत्र में उर्वरा रहा है। विभिन्न संस्कृतियों की संगम भूमि होने का गौरव भी इसे प्राप्त है। हजारी प्रसाद द्विवेदी, पं. प्रताप नारायण मिश्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जैसे साहित्य सर्जकों की भूमि होने का गौरव भी प्राप्त है। 1857 की क्रांति में भी जनपद के वीरों की भूमिका का जिक्र किया।

डीएम व एसपी को सम्मानित किया
आचार्य गुरु शरणानंद महाराज ने गंगा नारायण अवस्थी, दुर्गा शंकर दीक्षित, विष्णु दत्त द्विवेदी, हृदय नारायण शुक्ला तथा एसपी हरीश कुमार की कुंभ पुलिस और पोटली वाला पुस्तक पर विद्या रत्न सम्मान दिया। वहीं डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय, पं. गिरिधर शर्मा व्यास, यशवंत दत्ता, राजेंद्र प्रसाद मिश्र, प्रदीप दुबे, रामगोपाल त्रिवेदी को ब्राह्मण गौरव सम्मान दिया गया।

विश्व वैदिक सम्मेलन में 93 बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
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