यूएसएफडी स्क्रीन से होगी रेलपथ की निगरानी

Sultanpur Updated Sun, 24 Nov 2013 05:41 AM IST
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सुल्तानपुर। एक्सरे मशीन की तर्ज पर अब लखनऊ-वाराणसी वाया सुल्तानपुर रेलखंड की तस्वीर भी स्क्रीन पर देखी जा सकेगी। मंडल मुख्यालय से 28 स्टेशनों वाले उपमंडल को चार अल्ट्रासोनिक फ्लाडिटेक्टर (यूएसएफडी) डिजिटल यंत्र दिए जा रहे हैं। यंत्र से रेलवे लाइन के टूटने, ट्रैक की भार वाहन क्षमता कम होने व रेलपथ के नीचे की मिट्टी बारिश में बहने पर इंजीनियर समय रहते अवगत हो सकेंगे। रेल दुर्घटनाओं पर यंत्र से प्रभावी अंकुश लगेगा। यंत्र की मॉनिटरिंग सीनियर सेक्शन इंजीनियर स्तर के अफसरों को सौंपी गई है।
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लखनऊ-वाराणसी वाया सुल्तानपुर रेलखंड की अब तक मैनुअल तरीके से जांच होती रही है। इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से गैंगमैन को क्षेत्र निर्धारित कर गश्त के लिए भेजा जाता है। वह पटरियों की ऊपर से पड़ताल करने के बाद लाइन के कसाव की जांच करते हैं। ट्रैक पर गिट्टी व मिट्टी का दबाव कम होने पर कॉशन लगा दिया जाता है। इसके बाद ब्लॉक लेने का सिलसिला शुरू होता है। मंडल मुख्यालय से ब्लॉक मिलने पर ट्रेनों का आवागमन रोककर पटरियां व स्लीपर हटाकर आधार की जांच की जाती है। दोबारा नए सिरे से ट्रैक बिछानेपर ही कॉशन हटाने का निर्देश परिचालन विभाग को दिया जाता है। आमतौर पर रेलपथ के नीचे खराबी आने पर इंजीनियरों को जानकारी नहीं मिल पाती है। अल्ट्रासोनिक फ्लाडिटेक्टर यंत्र से इंजीनियरों को नहीं दिखने वाले क्षेत्र की भी फोटो मिल सकेगी। उच्च तकनीक से रेलगाड़ियों की दुर्घटना होने से पूर्व प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
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