गैर परंपरागत खेती कर किसानों ने लिखी कामयाबी की इबारत

Sultanpur Updated Sat, 23 Nov 2013 05:41 AM IST
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सुल्तानपुर। जिले के कई किसानों ने गैर परंपरागत ढंग से खेती करके कामयाबी की इबारत लिख डाली। सब्जी, फल व फूल की खेती करके जनपद के कई इलाकों के किसानों की इस पहल ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। सब्जी, फल व फूल की खेती से किसान कम लागत में अच्छे उत्पादन के साथ ही अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।
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मोतिगरपुर विकासखंड के घूरीपुर गांव निवासी किसान रामपाल सिंह सब्जियों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। वे गोभी, टमाटर व मिर्चा की खेती आधुनिक तरीके से करते हैं। उनकी वर्ष 2008 में कादीपुर विकासखंड के राईबीगो निवासी रामतीरथ वर्मा से मुलाकात हुई। रामतीरथ ने रामपाल सिंह को सब्जी की उन्नत खेती के लिए प्रेरित किया। जिस पर रामपाल सिंह ने सब्जी की खेती व्यावसायिक दृष्टिकोण से शुरू की। वर्ष 2009 में जिला उद्यान विभाग के कर्मचारी मो. फाजिल ने तकनीकी विधि से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। मौसमी सब्जी की खेती विस्तृत पैमाने पर शुरू कर रामपाल ने इसे आय का प्रमुख जरिया बना लिया। रामपाल सिंह ने इस बार नामधारी 585 प्रजाति के टमाटर की एक बीघे में रोपाई कराई है। एक हेक्टेयर में गोल्डन प्रजाति की फूल गोभी लगवाया है। इसमें करीब 35 हजार रुपये का खर्च आया है। इससे उन्हें करीब चार लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद है। दूबेपुर विकास क्षेत्र के अमहट गांव निवासी सुनील वर्मा बीते 15 वर्षों से पपीता की खेती करते हैं। इससे उन्हें सालाना करीब तीन से चार लाख रुपये की आमदनी होती है। उन्होंने इस वर्ष पपीता की खेती एक हेक्टेयर में कराई है। इसमें एक से डेढ़ लाख रुपये की लागत आई है। सुनील वर्मा का कहना है कि वे दो वर्ष से विदेशी सब्जी ब्रोकली की खेती कर रहे हैं। कहा कि जिले में ब्रोकली की बिक्री कम होने से ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता है। इस बार उन्होंने एक बीघे के लिए ब्रोकली की पौध डाली है।
कूरेभार विकास क्षेत्र के इनायतपुर गांव निवासी इरशाद अहमद खां ने दो वर्ष से केले की खेती शुरू की है। वे बताते हैं कि केले की खेती के लिए उद्यान विभाग से पौध व खाद, पानी के लिए आर्थिक मदद मिलती है। बीते वर्ष केले की खेती से उन्हें डेढ़ लाख की आमदनी हुई थी। जबकि खर्च तकरीबन 60 हजार रुपये हुआ था। बल्दीराय ब्लॉक के नंदौली गांव निवासी मो. जमील खां ने इस वर्ष रजनीगंधा की खेती कराना शुरू किया है। उन्होंने करीब एक बीघे में रजनीगंधा की बोआई कराई है।
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