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चहारदीवारी बनी नहीं, धन हो गया खर्च

Sonbhadra Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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सोनभद्र। जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के निर्माण में गड़बड़ी का बड़ा खेल सामने आया है। भवन निर्माण में गड़बड़ी तो हुई ही है साथ ही चहारदीवारी और विद्युतीकरण के नाम पर धन निकाल लिया गया और कार्य पूरा कराया ही नहीं गया। जुगैल में जांच में गए जिलाधिकारी चंद्रकांत भी इस गड़बड़ी पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
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ऐसी लड़कियां जिन्होंने गरीबी अथवा किसी अन्य वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ दी, उनकी शिक्षा के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। यह विद्यालय आवासीय होने के साथ ही इसमें अध्ययनरत छात्राओं को खाना से लेकर ड्रेस तक की सुविधा दी जाती है। परंतु विद्यालय भवन के निर्माण से लेकर अन्य कार्य में बड़ा खेल चल रहा है। सूत्रों की मानें तो जिले के नौ कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की चहारदीवारी निर्माण के लिए करीब दस लाख रुपये आए थे। ये रुपये कहां खर्च कर दिए गए इसका पता ही नहीं चल सका। खास यह है कि चहारदीवारी का निर्माण किसी भी विद्यालय पर पूर्ण ही नहीं हो सका है। म्योरपुर ब्लाक के इस विद्यालय में तो चहारदीवारी के नाम पर नींव खोदकर छोड़ दी गई है। इसी तरह से नंदना, बभनी और जुगैल में भी चहारदीवारी का निर्माण पूरा नहीं कराया गया है। इन विद्यालयों मेें अब तक विद्युतीकरण का कार्य भी नहीं हुआ है। सबसे ज्यादा दुर्दशा शौचालय निर्माण में की गई। नंदना में तो छोटा सा गड्ढा खोदकर शौचालय बना दिया गया, जिसकी पोल चंद दिनों में ही खुलकर सामने आ गई। हाल यह है कि इस विद्यालय की छात्राएं खुले मैदान में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। यही हाल जुगैल और बभनी का भी है। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा कैसे हो, यह सवाल गंभीर है। सवाल यह भी है कि यदि उनके साथ कोई वारदात होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। इन विद्यालयों की बेडिंग के लिए 75 हजार रुपये आया था लेकिन उसकी खरीददारी में भारी अनियमितता बरती गई थी। इसका खुलासा जिलाधिकारी चंद्रकांत की जांच में जुगैल में हो चुका है। दो दिन पूर्व जुगैल कस्तूरबा गांधी विद्यालय पर निरीक्षण में गए डीएम को वहां की छात्राओं ने जब अपनी पीड़ा बताई तो उनके कान खडे़ हो गए और उन्होंने संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश जारी कर दिया था। समझा जा रहा है कि यदि इन विद्यालयों में निर्माण कार्य से लेकर सामानों की आपूर्ति में हुई गड़बड़ी की जांच कराई जाए तो लाखों का घोटाल खुलकर सामने आ सकता है।

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