एक दशक बाद ही मिलेगा कनहर से लाभ!

Sonbhadra Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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सोनभद्र। आदिवासी इलाके में सिंचाई की कमी दूर करने के लिए बन रही कनहर परियोजना के निर्माण की गति देखकर लगता है कि एक दशक बाद ही इसका लाभ लोगों को मिल पाएगा। 36 साल से लटकी योजना का काम प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने गत नवंबर से शुरू कराया जरूर था। लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिल पाया है। अभी तो इस परियोजना में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए कमेटी बनी है। किसानों से ली जाने वाली जमीनों के रेट भी तय कर दिए गए हैं।
कनहर परियोजना का शिलान्यास 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने किया था। उस समय परियोजना की लागत 27.75 करोड़ रुपये तय की गई थी। प्रस्तावित कनहर बांध का एरिया 2000 वर्ग किलो मीटर है। सरकारी आंकड़े में 11 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। जबकि कनहर बचाओ संघर्ष समिति के अनुसार 25 गांव इस क्षेत्र में आ रहे हैं। 15 जनवरी 2011 को मुख्यमंत्री ने इस योजना का दोबारा शिलान्यास किया। इस परियोजना का काम शुरू होते ही अड़चन शुरू हो गई। विस्थापितों ने कनहर बचाओ संघर्ष समिति बनाकर आंदोलन शुरू कर दिया। 20 से 22 फरवरी 2011 के बीच डूब क्षेत्र के आदिवासी जगह-जगह बैठक करके कनहर परियोजना के विरोध में आंदोलन की रणनीति बनाते रहे। 14 मार्च 2011 को कनहर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों आदिवासियों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया। इनका विरोध अब भी थमा नहीं है। इधर काम काफी धीमी गति से हुआ। उधर विधान सभा चुनाव में कनहर परियोजना का मुद्दा तेजी से गरमा गया था। अखिलेश यादव ने इस परियोजना को पूरा करने का वादा किया था। सपा सरकार बनने पर सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने 7 नवंबर 2012 में अमवार में आकर इस परियोजना की शुरुआत कराई। उन्होंने इसके साथ जिले में कई और परियोजनाएं चालू कराने का वादा भी किया। खुले मंच से प्रदेश सरकार के हिस्से का 200 करोड़ देने का ऐलान किया। साथ ही कहा दस करोड़ लेकर आया हूं। सिंचाई मंत्री की सभा के दौरान भी विस्थापितों ने कनहर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले अपनी आवाज बुलंद की थी और मंत्री को मांगपत्र भी सौंपा था।

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