जिले में मलेरिया से हुई मौतों का रिकार्ड नहीं

Sonbhadra Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
सोनभद्र। यूपी के सबसे ज्यादा मलेरिया प्रभावित जिले सोनभद्र में इस गंभीर रोग से मरने वालों का कोई रिकार्ड नहीं है। जिले के स्वास्थ्य महकमे का मानना है कि यहां मलेरिया से कोई मौत ही नहीं हुई। जबकि अक्सर यहां मलेरिया से पीडि़त होकर लोग दम तोड़ रहे हैं।
चार राज्यों की सीमा से सटे जिले की भौगोलिक परिस्थिति काफी दुरुह है। पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों से भरे इस जिले में मलेरिया मौत का सबब बन गई है। जिले का ऐसा कोई इलाका नहीं है जहां इस गंभीर रोग का प्रकोप न हो। खासतौर पर दक्षिणांचल में मलेरिया से हर घर का कोई न कोई सदस्य बीमार रहता है। पिछले कुछ वर्षों में इस रोग से तमाम लोगों की मौत हो चुकी है। म्योरपुर, बभनी और जुगैल का इलाका इस रोग से ज्यादा प्रभावित रहता है। इस वर्ष भी मलेरिया से कई रोगियों की मौत हो चुकी है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास इन मौतों का कोई रिकार्ड नहीं है। जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रामअवध यादव और जिला मलेरिया अधिकारी डा. एलसी जायसवाल का कहना है कि पिछले कई वर्षों से जिले में मलेरिया से कोई मौत ही नहीं हुई तो फिर रिकार्ड किस बात का बनाया जाय। इस बात का रिकार्ड रखा जाता है कि कितने लोगों की मलेरिया संबंधी जांच हुई, कितने पाजीटिव और कितने निगेटिव मरीज पाए गए। उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह में मलेरिया जांच की कुल 13628 स्लाइड बनी थी जिसमें से 1440 मरीजों को धनात्मक मलेरिया और 17 को पीएफ निकला। जबकि जनवरी 2012 से अब तक कुल 88170 मरीजों की स्लाइड बनी जिसमें से 8612 पाजीटिव और 57 पीएफ मरीज पाए गए। अब सवाल यह उठता है कि क्या जरूरी है कि इन गंभीर मरीजों में से किसी की भी मौत नहीं होगी। सीएमओ ने तो यहां तक कहा कि मलेरिया से लोग पीडि़त तो होते हैं लेकिन गैर जिलों में उपचार के दौरान यदि किसी की मौत हो जाती है तो फिर रिकार्ड कैसे तैयार होगा। सीएमओ का मानना है कि प्रदूषित जल के सेवन और अन्य कारणों से मौतें हुई हैं लेकिन मौतों के क्या कारण हो सकते हैं इस पर वे कोई जवाब नहीं दे सकते। अफसरों का कहना है कि मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग मुहैया संसाधनों से काम चला रहा है।

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एडी ने दिया रिकार्ड तैयार करने का निर्देश
सोनभद्र। जिले में निरीक्षण पर आए अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. वी.के. श्रीवास्तव ने मलेरिया और उससे हो रही मौतोें को गंभीरता से लिया है। उन्होंने मौतों की जांच कर उसका रिकार्ड तैयार करने का निर्देश सीएमओ को दिया है।
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लक्ष्य के सापेक्ष नहीं मिली दवाएं
सोनभद्र। जिले में मलेरिया की गंभीरता को लेकर शायद केंद्र व प्रदेश सरकारें गंभीर नहीं हैं। वित्तीय वर्ष 2012-13 में डीडीटी पाउडर का लक्ष्य 100 मिट्रिक टन रखा गया था जिसमें से महज 46 एमटी ही पाउडर अब तक मुहैया हो सका है। जिले मलेरिया अधिकारी एलसी जायसवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मैलाथियान के लिए 300 एमटी लक्ष्य था लेकिन इस वर्ष अब तक इस मद में कुछ भी नहीं आ सका है। ऐसे में तमाम जगहों पर मलेरियारोधी दवाओं का छिड़काव नहीं हो पा रहा है।

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मच्छरदानी के लिए आया 70 लाख वापस
सोनभद्र। जिले में मलेरिया से प्रभावित बीपीएल कार्डधारक परिवारों को इस रोग से बचाव के लिए 70 लाख रुपये शासन ने पिछले वर्ष भेजा था। इस धन से मच्छरदानी की खरीद की जानी थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी खरीदा ही नहीं। शायद उन दिनों एनआरएचएम घोटाले की परत-दर-परत खुल रही पोल से दहशतजदा अधिकारियों ने इस मद को छूने की हिम्मत ही नहीं जुटाई और यह पैसा शासन को लौटा दिया।

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