जिले में ठप है मनरेगा के तहत विकास कार्य

Sonbhadra Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
सोनभद्र। जिले में मनरेगा के बजट से विकास का कार्य ठप है। इससे मजदूरों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में इस योजना में अब तक जिले को महज 26 करोड़ रुपये ही मिले हैं। पर्याप्त धन न मिल पाने के कारण कार्यदायी संस्थाओं को भी धन का आवंटन नहीं हो सका है जिससे कार्य पूरी तरह से ठप है।
केन्द्र सरकार की बहु प्रचारित योजना मनरेगा के धन से होने वाला विकास कार्य पिछले काफी दिनों से ठप चल रहा है। जिले का शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां इस धन से कोई कार्य कराया जा रहा हो। जबकि जब इस योजना की शुरूआत हुई थी तो जिले में भारी-भरकम बजट आया था और लगभग प्रत्येक गांव को अच्छी खासी रकम मिली थी जिससे गांवों में नाली, चेकडेम, बंधी, सड़क, कुएं, रपटे समेत तमाम कार्य कराए गए थे। इससे मजदूरों को भी काफी राहत थी। शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी मजदूरों को मुहैया हो जाती थी जिससे मनरेगा मजदूरों को काफी राहत थी, लेकिन जब से यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी और इसके धन से हुए कार्यों की जांच के बाद तमाम लोगों पर कार्रवाई हुई तब से ज्यादातर कार्यदायी संस्थाएं इस धन से कार्य कराने से हिचक रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में जिले को मनरेगा से करीब 90 करोड़ रुपये मिले थे जिससे कामकाज हुआ था लेकिन इस वर्ष अप्रैल से अब तक महज 26 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। हालांकि अभी इस वित्तीय वर्ष को समाप्त होने में पांच माह है। कुछ ग्राम प्रधानों का कहना है कि अच्छा कार्य भी कराया जाएगा तो कुछ न कुछ कमी मिल ही जाएगी और फिर अफसरों द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी तो फिर आखिरकार कैसे विकास की उम्मीद की जाए। कमोवेश ऐसा ही हाल ब्लाकों का भी है। इन सब का खामियाजा सीधे तौर पर मनरेगा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।

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13 ग्राम पंचायतों को मिले साढे़ छह लाख
सोनभद्र। जिले में मनरेगा के तहत शासन के आदेश पर 13 ग्राम पंचायतों को 50-50 हजार रुपये आवंटित किया गया है जो ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। 12 अक्तूबर को बभनी के दो, चतरा की पांच, चोपन की तीन, म्योरपुर की दो और नगवां की एक ग्राम पंचायत को 50-50 हजार रुपये मनरेगा के तहत विकास कार्य कराने के लिए दिया गया है। इस तरह से 13 ग्राम पंचायतों को कुल साढे़ छह लाख रुपये दिए गए हैं। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिरकार इतने कम बजट में गांवों का क्या विकास होगा।


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जिले में मनरेगा के तहत बजट का आवंटन नहीं हो सका है जिससे कार्यदायी विभागों को पैसा नहीं दिया जा सका है। इससे मनरेगा का कार्य नहीं हो पा रहा है। कार्य बंद होने की और कोई दूसरी वजह नहीं है। धन आवंटन होते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
रामकृष्ण उत्तम, प्रभारी जिलाधिकारी, सोनभद्र।

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