दो दिवसीय गौ वैज्ञानिक शिविर का हुआ आगाज

Sonbhadra Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
ओबरा (संवाददाता)। क्लब नंबर चार में मंगलवार को गौ विज्ञान दो दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। इसमें गौ वैज्ञानिक तामिलनाडु के काचिपुरम से आए महर्षि वाभ्य भट्ट ने देशी गाय से रोगों के उपचार के रोकथाम तथा लाभ के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
उन्होंने बताया कि गौशाला का अर्थ है कि गाय की सेवा करना है। वर्तमान परिवेश में देशी गाय से बीमारी का उपचार हो सकता है। मनुष्य जीवन में मुख्य रूप से 148 रोग होते हैं, जिनमें से 110 रोगों की चिकित्सा हम अपने घर की रसोई व बगीचे की औषधि से कर सकते हैं। शेष 38 असाध्य रोगों का उपचार देशी गाय द्वारा मिलने वाले पंच गव्य अर्थात दूध, दही, मक्खन, गौमूत्र व गोबर से हो सकता है। गाय अपने में एक संपूर्ण चिकित्सा विज्ञान है। पंच गव्य के सेवन से मधुमेह, चर्मरोग, कैंसर, हृदय, लीवर, कीडनी से संबंधित रोगों पर पूरी तरह रोकथाम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शरीर में 24 तत्व होते हैं, जिससे हमारा शरीर बना हुआ है। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी रमेश सिंह यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के निशांत कुशवाहा के अलावा वीरभद्र राय, अखिलेश राय, पतीतपावन सिह, अजीत तिवारी, चंदन तोमर, उमेश सिह, महेंद्र यादव, गिरीशदत्त गिरि, रमाशंकर द्विवेदी आदि उपस्थित थे।

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