खनन और क्रसर बंदी से कबूतरबाजों की चांदी

Sonbhadra Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
ओबरा। जिले में पत्थर खदानों की बंदी से कबूतरबाजों का धंधा तेजी पकड़ लिया है। बेरोजगारी का फायदा यह उठाने लगे हैं। क्षेत्र से अन्य प्रांतों में मजदूरों की सप्लाई भेजने वाला लगभग आधा दर्जन गिरोह सक्रिय है। प्रशासन की शिथिलता के कारण ऐसे कबूतरवाज मोटी रकम लेकर मजदूरों को गुलामी एवं यातनापूर्ण वातावरण में काम करने को विवश कर देते हैं। ऐसे ही दो कबूतरवाजों का खुलासा होने से क्रशर क्षेत्र के मजदूरों में दहशत व्याप्त है।
स्थानीय शारदा मंदिर के पास रहने वाला कबूतरबाज वीरेंद्र मुंशी ने आसपास के झोपड़पट्टियों से लगभग 50 मजदूराें को महाराष्ट्र के पूना स्थित सीमेंट ब्रीक बनाने वाली कंपनी में भेजा। कंपनी द्वारा यातना दिए जाने व बंधुआ मजदूरी कराए जाने से पीड़ित होकर इन मजदूरों की टोली से सोनू पुत्र प्रदीप किसी तरह भाग कर घर लौटा तब कहीं जाकर मामले का खुलासा हुआ। सोनू ने बताया कि वीरेंद्र मुंशी द्वारा कहस गया था मजदूरों को दो सौ रुपये रोज की मजदूरी व रहने का डेरा दिया जाएगा, जिससे वीरेंद्र के झांसे में आकर जटाशंकर, संतोष, सुनील, बाबा, डेविड, ममता, शंकर, गुड्डी सहित लगभग 50 मजदूर पूना के लिए गए थे, लेकिन वहां पर मजदूरों से 24 घंटे काम लिया जाता रहा। उसके अलावा कंपनी ठेकेदार द्वारा उनके साथ बराबर अमानवीय व्यवहार भी किया जा रहा है। सोनू ने बताया कि मेरी तबीयत खराब हो गई थी, लेकिन इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी। हमने घर जाने की इच्छा जाहिर किया तो मुझे मारा पीटा गया।
रात के अंधेरे में बिना किराया के हम वहां से किसी तरह भाग निकलने में सफल हुए। भूखे प्यासे पूना से मिर्जापुर तक पहुंचने में मुझे लगभग एक सप्ताह लग गया। क्योंकि पैसे के अभाव में ट्रेन का टिकट नहीं ले पाए थे, जिससे रास्ते में रेलवे पुलिस द्वारा बार बार ट्रेन से बाहर कर दिया जाता रहा। मिर्जापुर पहुंच कर अपने मां को फोन से सूचित किए तब कहीं जाकर ओबरा अपने घर पहुंच पाए। इसके अलावा दूसरे कबूतरवाज का भी मामले का उजागर हुआ।
स्थानीय निवासी लालती देवी ने बताया कि बिल्ली रेलवे स्टेशन के पास रहने वाला काशी सेठ ने भी तीन माह पूर्व लगभग 50 मजदूरों को दिल्ली आनंद बिहार के लिए भेजा था, जिसमें हमारा पुत्र राम सूरत भी गया है। तीन महीने से मेरे लड़के को कोई मजदूरी का पैसा नहीं दिया जा रहा है। काशी सेठ के घर पर अक्सर ताला बंद रहता है, जिससे लड़के के तबीयत की भी सही जानकारी न मिलने के कारण मन बहुत व्याकुल है। क्रशर बंदी का खामियाजा झेल रहे मजदूर अपना पेट पालने के लिए दर दर की ठोकर खाने पर मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन इस पर कड़ा निर्णय नहीं लेता है तो बेरोजगार हुए हजारों मजदूरों को यातनापूर्ण जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Chandigarh

अपने ही दो भाइयों, दो बहनों समेत 7 लोगों को मारने वाली पर नहीं कर सकते रहम: हाईकोर्ट

अपने ही दो भाइयों, दो बहनों और दादी समेत सात लोगों की हत्या करने वाली पर रहम नहीं किया जा सकता। उसकी और उसके प्रेमी की मौत की सजा बरकरार रहेगी।

18 जुलाई 2018

Related Videos

VIDEO: सफारी में सवारी बनी जानलेवा, चार की हुई मौत

सोनभद्र में सफारी की सवारी कर रहे सात लोग एक बड़े हादसे का शिकार हो गए। राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में वाराणसी- शक्तिनगर स्टेट हाइवे पर उनकी गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई।

11 जुलाई 2018

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen