बरसात ने बुझाई रिहंद की प्यास

Sonbhadra Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
रेणुकूट। पिछले एक सप्ताह से ऊर्जांचल सहित मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण रिहंद बांध के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। इसको देखते हुए इस वर्ष भी जल विद्युत उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद है साथ ही ताप विद्युत गृहों को गर्मी के दिनों में जल संकट से मुक्ति मिलेगी। यही नहीं औद्योगिक नगरी में रहने वालों की भी प्यास बुझाने में काफी मदद मिलेगी।
प्रदेश में बारिश की कमी के कारण जहां सूखाग्रस्त घोषित करने की योजना तैयार की जा रही है, वहीं सोनांचल के अलावा सीमावर्ती प्रांतों में लगातार हो रही बारिश के चलते गोविंद बल्लभ पंत सागर की प्यास बुझ गई है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में गत वर्ष की भांति इस बार फिर से रिहंद के फाटक खोलकर जल निकाला जा सकता है। ज्ञातव्य है कि पिपरी स्थित रिहंद बांध में बारिश के कारण एकत्र जल से सागर के तटवर्ती इलाकों में स्थित 20 हजार मेगावाट ताप विद्युत गृहों का संचालन होता है। उन विद्युत गृहों को थर्मल कूलिंग के लिए भारी जल की आवश्यकता होती है, जिसकी भरपाई इस सागर से होती है। पानी की कमी के कारण गर्मी के दिनों में उपरोक्त इकाइयों में उत्पादन ठप होने का खतरा मंडराने लगता है। पिछले वर्ष भारी वर्षा के कारण रिहंद का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। बांध स्थित तेरह फाटकों के माध्यम से जल निस्तारित कर सामान्य स्थिति में की गई थी। इस वर्ष उम्मीद से कम बारिश होने के कारण जलस्तर में फिर भी संतोषजनक वृद्धि हुई है। अधिशासी अभियंता विद्युत उत्पादन खंड पिपरी शैलेष कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को रिहंद का जलस्तर 845 फीट दर्ज किया गया। जबकि पिछले वर्ष आज ही के दिन 849.2 फीट जलस्तर था। बांध में स्थित पचास-पचास मेगावाट की छह इकाइयों में से दो इकाइयों से 90 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है। जबकि दो इकाइयां वार्षिक अनुरक्षण में हैं। शेष इकाइयों को जलस्तर बढ़ने पर उत्पादन की स्थिति में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रिड फेल होने पर जब 22 राज्यों में अंधेरा छा गया था तब रिहंद बांध से पंद्रह मिनट के अंदर ताप विद्युत गृहों को उत्पादन हेतु साट आफ पावर की सप्लाई दी गई थी। इससे ग्रिड को बचाने में काफी मदद मिल गई थी। रिहंद बांध का अधिकतम जल अधिग्रहण क्षमता 880 फीट रखी गई थी। परंतु बांध में भारी मात्रा में औद्योगिक कचरे और सिल्ट आदि के पट जाने तथा बांध की स्थिति जर्जर होने की वजह से इसकी क्षमता घटाकर केंद्रीय जल आयोग ने 870 फीट कर दी थी। इससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जलस्तर के लगातार बढ़ने से एक बार फिर से रिहंद के अलावा चोपन में भी सैलानियों का रेला लग सकता है।

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