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जहां कम बरसात वहां पर लोग हो रहे मायूस

Sonbhadra Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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घोरावल(सं.)। अबकी सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई, मेरे घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई, गोपाल दास नीरज की लिखी शेर घोरावल क्षेत्र के वासियों पर सटीक बैठ रही है। गुरुवार की रात जहां जनपद में अच्छी बरसात हुई। वहीं घोरावल तहसील में मात्र फुंहारें पड़ कर रह गई। ऐसे में किसानों के सामने खेती को लेकर मुश्किलों के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
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पहले अच्छी बरसात होने से पहाड़ी नाले के पानी से कुछ क्षेत्र के पोखर, तालाब भर जाते हैं। ऐसे में क्षेत्र के एक तिहाई किसानों के लिए धान की खेती करना आसान हो जाता है। सावन का महीना आधे से अधिक गुजर गया और किसान धान की नर्सरी डाल अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। थोड़ा बहुत बारिश होने से न तो तिल, अरहर, उरद, ज्वार, बाजरा और मक्के की बुआई ही हो पा रही है और न ही धान क ी खेती।

सावन के शुरुआत में एक दिन अच्छी बारिश तो हुई जरुर और किसान धान की नर्सरी भी डाल दिए, लेकिन अब वो अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मानसून की बेरुखी को देख ऐसा लग रहा है जैसे घोरावल के रहवासियों से मानों इंद्र्रदेव रूठ से गए हैं। इससे किसानों के चेहरे के रंगत भी उड़ने लगे हैं। कुछ घर में पैसे बचे भी थे तो उसे वे नर्सरी डालने में खर्च कर दिये। यदि यही हाल रहा तो धान की रोपाई तो दूर की बात आने वाले कुछ दिनों में उन्हें खाने के लाले पड़ जाएंगे।
शिवेश पांडेय/सुनील सिंह

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